वहीं विदेश से आयात होने वाले जूते-चप्पल जिनकी कीमत 4 हजार रुपये से ज्यादा है, उनके दाम बढ़ गए हैं। इन वस्तुओं के अलावा स्पीकर, जूते, रेडियल कार टायर, आभूषण सामग्रियां, कई तरह के हीरे, बाथरूम, रसोई और घरों में काम आने वाले कुछ साजो-सामान, प्लास्टिक के कुछ खास सामान तथा ऑफिस स्टेशनरी, ट्रंक तथा हवाई जहाज के इंधनों पर भी शुल्क बढ़ा है।
86,000 करोड़ खर्च हुए इनके आयात पर गत साल
वित्त मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक पिछले वित्तीय वर्ष में इन वस्तुओं के शिपमेंट में 86 हजार करोड़ रुपये का आयात बिल बना था। वित्त मंत्रालय ने कहा कि केंद्र सरकार ने यह कदम अनावश्यक वस्तुओं के आयात को रोकने के लिए उठाया है। इस निर्णय का लक्ष्य चालू खाता घाटे (सीएडी) को कम करना है। बता दें कि जिन सामानों के आयात पर बेसिक कस्टम ड्यूटी बढ़ाई गई है, वित्त वर्ष 2017-18 में करीब 86 हजार करोड़ रुपये मूल्य के वे सामान विदेश से खरीदे गए थे।
अमेरिका-चीन ट्रेड वार का दिख रहा असर
कहा जा रहा है कि अमेरिका और चीन के ट्रेड वार को लेकर भारत में भी असर दिख रहा है। आज आधी रात से इन 19 सामानों के आयात पर बढ़े हुए दर से आयात शुल्क देना होगा। इससे गैर-जरूरी सामानों का आयात तो रुकेगा ही, डॉलर की खपत कम होगी। मेक इन इंडिया अभियान को भी इस फैसले से बढ़ावा मिलेगा। इस निर्णय से चीन भी प्रभावित होगा क्योंकि वहां से भारी मात्रा में सामान भारत आता है।