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IMF का भरोसा कायम: महंगे होते तेल के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत; जानें विकास दर को लेकर क्या कहा?

Thu, 09 Jul 2026 02:22 PM IST
Asmita Tripathi आईएएनएस,वॉशिंगटन

सार

आईएमएफ ने 2026 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान मामूली घटाकर 6.4% किया है, लेकिन मजबूत घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियों के चलते अर्थव्यवस्था को मजबूत बताया। पश्चिम एशिया में तनाव से तेल महंगा होने का असर रहेगा।

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आईएमएफ की रिपोर्ट में क्या खास? - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे टकराव की वजह से दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। हालांकि, वैश्विक आर्थिक संस्था ने भारत की 2026 की ग्रोथ का अनुमान थोड़ा घटाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया है, लेकिन साथ ही यह भी कहा है कि अगले साल ऊर्जा से जुड़ी दिक्कतों के कम होने पर देश की ग्रोथ और तेज होगी। 

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वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक में क्या है?
आईएमएफ ने अपने ताजा 'वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक' रिपोर्ट में 2026 के लिए भारत की ग्रोथ का अनुमान अप्रैल के अनुमान से 0.1 प्रतिशत अंक घटा दिया, लेकिन 2027 के लिए अनुमान 0.2 प्रतिशत अंक बढ़ा दिया।  आईएमएफ का कहना है कि उम्मीद से बेहतर आर्थिक गतिविधि और मजबूत घरेलू मांग देश के आउटलुक को सहारा दे रही है।

भारत के बारे में आईएमएफ ने क्या कहा?
आईएमएफ अधिकारियों ने अपनी ताजा 'वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक' रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि भारत ने कई दूसरी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले ग्लोबल अनिश्चितता का बेहतर ढंग से सामना किया है, हालांकि पश्चिम एशिया में चल रहे टकराव की वजह से ऊर्जा की बढ़ती कीमतें इस साल विकास दर पर असर डालेंगी।

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2027 के लिए विकास दर का क्या अनुमान?
आईएमएफ रिसर्च विभाग की प्रमुख डेनिज इगन ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पत्रकारों को बताया, 'भारत के लिए हमने इस साल के अनुमान को बहुत मामूली रूप से 0.1 प्रतिशत अंक घटाकर 6.4 कर दिया है। और अगले साल, यानी 2027 के लिए विकास दर के अनुमान को 0.2 प्रतिशत अंक बढ़ा दिया है।' इगन ने कहा, 'अच्छी बात यह है कि हाल के डेटा में नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं। साथ ही, अप्रैल तक के हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर भी दिखाते हैं कि कुल मिलाकर आर्थिक गतिविधियों में काफी मजबूती बनी हुई है।'

ऊर्जा की बढ़ती कीमतों को लेकर क्या कहा?
हालांकि, उन्होंने कहा कि इस साल ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने इस सकारात्मक गति के असर को खत्म कर दिया है। हालांकि,आईएफएफ को उम्मीद है कि अगले साल ये दबाव कम हो जाएंगे। इगन ने कहा, '2027 की ओर बढ़ते हुए, हमें उम्मीद है कि भारत की ग्रोथ और मजबूत होगी क्योंकि एनर्जी शॉक का असर कम हो जाएगा और मीडियम-टर्म ग्रोथ लगभग 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है।' भारत के लिए यह नया अनुमान तब आया है, जब आईएमएफ ने 2026 के लिए ग्लोबल ग्रोथ का अनुमान 3 प्रतिशत और 2027 के लिए 3.4 प्रतिशत पर लगभग वैसा ही बनाए रखा है।

आईएमएफ का कहना है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था ने अब तक पश्चिम एशिया के संघर्ष का सामना शुरुआती आशंकाओं से बेहतर तरीके से किया है। इसके अतिरिक्त, आईएमएफ ने 2026 के लिए ग्लोबल हेडलाइन महंगाई का अनुमान भी बढ़ाकर 4.7 प्रतिशत कर दिया है। उसका कहना है कि 2024 की शुरुआत से चल रहा महंगाई कम होने का ट्रेंड रुक गया है। साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में तेजी से हो रहा इन्वेस्टमेंट एनर्जी की ऊंची कीमतों से हुए कुछ आर्थिक नुकसान की भरपाई करने में मदद कर रहा है, जिससे ग्लोबल टेक्नोलॉजी वैल्यू चेन से जुड़े देशों को फायदा हो रहा है।

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा आयात करता है, इसलिए ग्लोबल एनर्जी की कीमतें महंगाई, चालू खाते और कुल आर्थिक ग्रोथ पर असर डालने वाला एक अहम फैक्टर हैं। होर्मुज स्ट्रेट से तेल की सप्लाई में लंबे समय तक कोई रुकावट आने पर भारत के लिए आयात की लागत बढ़ सकती है और घरेलू ईंधन की कीमतों पर फिर से दबाव पड़ सकता है।

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