भारत में किसानों के लिए खेती करना पूरी तरह से मौसम पर निर्भर होता है। हालांकि किसानों को इस बात की सटीक जानकारी नहीं मिलती है कि बारिश, तूफान, सूखा, बाढ़ उनके इलाके में कितना असर डालेगा। लेकिन अब किसानों को अगले साल से इस बात की चिंता करने की किसी तरह कोई बात नहीं है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) स्थानीय स्तर पर मौसम का पूर्वानुमान जारी करने लगेगा। इससे करीब 9.5 करोड़ किसानों को फायदा होगा।
आईएमडी के मुताबिक इस प्रोजेक्ट में देश भर के करीब 6,500 ब्लॉक कवर होंगे। यह ब्लॉक देश के 660 जिलों में मौजूद हैं। हालांकि अभी कृषि मौसम परामर्श सेवाओं (एएएस) को ज्यादा उपयोगी व फायदेमंद एक चुनौतीपूर्ण कार्य होगा। फिलहाल मौसम विभाग जिला स्तर के लिए परामर्श को जारी करता है।
200 ब्लॉक्स में पायलट स्टडी जारी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 तक 660 जिलों के 6500 ब्लॉक्स को कवर करने का लक्ष्य है। इससे किसानों के लिए मौसम संबंधित नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी।
अत्री ने कहा कि मौसम विभाग के पास मौसम आधारित परामर्श जारी करने के लिए जिला स्तर पर 130 एग्रोमेट फील्ड यूनिट्स का नेटवर्क है। अब कृषि विज्ञान केंद्रों में ‘ग्रामीण कृषि मौसम सेवा’ के अंतर्गत अतिरिक्त 530 जिलों में ऐसी यूनिट्स तैयार की जा रही हैं।
अत्री ने कहा कि फिलहाल देश के चार करोड़ किसानों को जिला स्तरीय मौसम परामर्श केंद्र से लाभ मिल रहा है। इसको आगे ले जाने का टारगेट है। देश भर में किसानों को मौसम संबंधी पूर्वानुमान मिल जाने से खेती को होने वाले फायदे या फिर नुकसान का पता चल जाएगा, जिससे वो अपनी तैयारी पहले से कर सकेंगे। आईसीएआर के सहायक निदेशक एके सिंह ने कहा कि इसके लिए हमें सरकारी, गैर सरकारी और एनजीओ के साथ मिलकर काम करना होगा, ताकि किसानों को अच्छा फायदा मिल सके।