मौसम की निजी जानकारी देने वाली संस्था स्काईमेट के बाद अब बुधवार को मौसम विभाग ने भी मानसून का अनुमान बता दिया है। भारतीय मौसम विभाग ने कहा है कि इस बार मानसून केरल में 6 जून को दस्तक देगा।
मौसम विभाग का कहना है कि दक्षिणपूर्व मानसून इस बार अंडमान-निकोबार भी थोड़ा देरी से पहुंचेगा। इसके यहां 18-19 मई तक पहुंचने की संभावना है। ऐसा इसलिए क्योंकि बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में मानसूनी हवाएं देर से उठेंगी।
मानसून का सीधा तार देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ा हुआ है। किसानों से लेकर के सरकार के बजट पर मानसून अपना प्रभाव दिखाता है। अगर मानसून कमजोर रहता है तो फिर खाद्य उत्पादन कम होगा, जिससे किसानों की दशा और खराब होगी। वहीं इससे महंगाई भी बढ़ेगी, जिसका असर आम लोगों पर पड़ेगा। अनाज, फल-सब्जियों व अन्य खाने-पीने का उत्पादन कम होने से बाजार में इनकी कमी हो जाएगी, जिससे कीमतों पर भी असर पड़ेगा।
स्काईमेट ने मध्य भारत में सबसे कम 91% बारिश का अनुमान लगाया है। पूर्वोत्तर में 92%, दक्षिण में 95% और पश्चिमोत्तर में 96% बारिश हो सकती है। इस तरह देश के कई राज्य जैसे कि मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ में सूखा पड़ सकता है।
समुद्री हवाओं का रुख बदल जाता है। बारिश वाले क्षेत्रों में बारिश नहीं होती, इसके उलट जिन इलाकों में बारिश नहीं होती है, वहां मूसलाधार बारिश होती है।
कमजोर मानसून के होने से नई सरकार के लिए भी काफी मुश्किल हो जाएगी। महंगाई को काबू में रखने के लिए सरकार को ज्यादा रियायतें देनी होगी। इसके अलावा रिजर्व बैंक भी अपने रेपो रेट को बढ़ा सकता है, जिससे लोन के ब्याज पर असर पड़ेगा।
स्काईमेट ने 2019 में 93 प्रतिशत बारिश की संभावना जताई है। मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार इस साल भारतीय उप महाद्वीप में मानसून शुरुआती दौर में थोड़ा कमजोर रहेगा। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत तथा मध्य भारत में कम बारिश की आशंका है। जबकि उत्तर पश्चिम और दक्षिण भारत में स्थिति बेहतर होगी।
इस साल दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़ में मानसून के सामान्य रहने की संभावना है। जिसके चलते लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिलने के आसार है। मानसून की बारिश का असर जून और जुलाई में अधिक दिखेगा। दिल्ली-एनसीआर में 29 जून के करीब मानसून की दस्तक होगी। जिसके बाद लोगों को गर्मी से राहत के आसार हैं। वहीं इस साल महाराष्ट्र, विदर्भ, तमिलनाडु, कर्नाटक, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल में औसत से कम मानसून रहने की संभावना है।
स्काइमेट के आंकड़ों के अनुसार जून - जुलाई अगस्त और सितंबर में देश के मौसम को लेकर निम्न पूर्वानुमान हैं।