नया वित्त वर्ष शुरू हो गया है। लोग सोच रहे हैं कि क्या इस बार उन्हें अधिक मोटर बीमा प्रीमियम का भुगतान करना होगा, यदि उनके पास पिछले वित्त वर्ष के दो से अधिक लंबित, भुगतान न किए गए चालान हैं। हालांकि, वर्तमान प्रस्ताव अभी तक लागू नहीं हुआ है और यह मसौदा चरण में है। पॉलिसी जारी होने के बाद चालान की स्थिति को ट्रैक करना व्यावहारिक और प्रणालीगत चुनौतियों का सामना करना होगा है। ऐसे में सड़क परिवहन मंत्रालय, राज्य यातायात विभाग और बीमा कंपनियों के बीच एक सुरक्षित और निरंतर डाटा को साझा करने वाले तंत्र की जरूरत है। हालांकि, इसे लागू करना आसान नहीं होगा, क्योंकि इसके लिए डिजिटल व्यक्तिगत डाटा संरक्षण अधिनियम के तहत कई गोपनीयता और अनुपालन चिंताओं को सुलझाना होगा।
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राज्यस्तरीय डाटा बेस जुटाना प्रमुख समस्या
प्राथमिक बाधा राज्यस्तरीय डाटाबेस को एकीकृत करना है। भारत के डाटा संरक्षण अधिनियम के कारण यह और भी चुनौतीपूर्ण बन जाता है। बीमा कंपनियों के लिए इसे लागू करने में सरकारी ई-चालान प्रणालियों तक प्रत्यक्ष और वास्तविक समय में पहुंच चाहिए। इस प्रस्ताव में यह भी है कि तीन महीने के भीतर ट्रैफिक ई-चालान का भुगतान न करने पर ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित कर दिया जाए। यह प्रस्ताव भी अभी तक लागू नहीं हो पाया है।
ये भी पढ़ें: Nirmala Sitharaman: अमेरिका-पेरू की 11 दिवसीय यात्रा पर वित्त मंत्री, प्रबंधन फर्मों के सीईए से करेंगी मुलाकातकोई व्यक्ति वित्त वर्ष में दो से अधिक बकाया या लंबित चालान आगे बढ़ाता है, तो मसौदे के अनुसार उसे अगले साल वाहन की बीमा पॉलिसी के लिए अधिक प्रीमियम का भुगतान करना पड़ सकता है। इस नियम से यह फायदा होगा कि जिन भी चालान का वर्षों तक नहीं भुगतान होता है, उनका तुरंत भुगतान होगा। -मधुसूदन राय, वित्तीय सलाहकार