चीन की आर्थिक सुस्ती से निपटने के लिए प्रयासरत निवेशकों के लिए एक और मुसिबत आकर खड़ी हो गयी है। ब्रिटेन में आगामी 23 जून को यूरोपियन यूनियन में बने रहने या अलग होने को लेकर एक जनमत संग्रह होने जा रहा है,अगर इसका नतीजा यूरोपियन यूनियन से बाहर होने के पक्ष में होगा तो ये भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए घातक साबित हो सकता है।
एक ओर जहां ब्रिटिश इकॉनोमी से जुड़े देशों का हित प्रभावित होगा, वहीं अगर ब्रिटेन यूरोपियन यूनियन से बाहर नहीं होगा तो स्थितियां जस की तस रहेंगी। पिछले कुछ दिनों में लोगों के बीच कराए गए पोल नतीजों से ब्रिटेनवासियों का यूरोपियन यूनियन के साथ बने रहने का मत ज्यादा नजर आ रहा है।
वहीं अगर भारत के नजरिए से बात की जाए तो यूरोपियन यूनियन के साथ व्यापारिक रिश्तों के अलावा यह देश भारत के लिए सबसे बड़े एक्सपोर्ट मार्केट भी है। गौरतलब है कि यूरोपियन यूनियन की इकॉनोमी 16 खरब डॉलर की है। जो पूरी दुनिया की जीडीपी के एक चौथाई के बराबर है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2015-16 में ब्रिटेन के साथ भारत का व्यापार 14.02 अरब डॉलर रहा है। इसमें 8.83 अरब डॉलर का निर्यात रहा, जबकि 5.19 अरब डॉलर का आयात शामिल था।
इस तरह से दिपक्षीय कारोबार में भारत 3.64 बिलियन डॉलर के कारोबारी फायदे में रहा है। कुछ अध्ययनों के मुताबिक यदि ब्रिटेन की जनता ईयू से अलग होने के पक्ष में फैसला लेती है तो उसके आयात में 25 फीसद कमी आएगी। जानकारों के अनुसार ये ट्रेंड दो सालों तक जारी रहेगा, जिससे भारत का निर्यात प्रभावित होगा।