अंतरराष्ट्रीय वायु परिवहन संघ (आईएटीए) के महानिदेशक विली वॉल्श ने कहा, भारत उन नागरिक विमानन बाजारों में से एक है, जहां विकास के अविश्वसनीय अवसर हैं। इसकी वृद्धि दर चीन से आगे निकलने की उम्मीद है। हालांकि, भारत में कर प्रणाली बहुत जटिल है। यह कई वर्षों से हमारे उद्योग की विशेषता रही है। इसलिए, यह कोई नया मुद्दा नहीं है।
वॉल्श ने कहा, भारत को अपनी क्षमता का पूर्ण दोहन करने और इस दृष्टिकोण को वास्तविकता में बदलने के लिए कराधान के मुद्दे पर ध्यान देना होगा। इसका मतलब यह नहीं है कि कराधान समाप्त करना होगा। लेकिन, इस बारे में स्पष्ट समझ होनी चाहिए कि कराधान नियम किस प्रकार लागू होते हैं। विमानन कंपनियों को कभी-कभी मौजूदा नियम की एक नई व्याख्या मिलती है, जो पहले से पूरी तरह अलग होती है।
आईएटीए के महानिदेशक ने कहा, ऐसी स्थिति में करों के लिए दावा किया जाता है, जिसका भुगतान नहीं किया गया है। यह कई वर्षों तक मुकदमेबाजी और चर्चाओं का कारण बनता है, जो आखिरकार हल हो जाता है। कई मामलों में यह विमानन कंपनी के पक्ष में जाता है। उन्होंने आगे कहा, विमानन कंपनियां किफायती कीमत पर कुशल हवाईअड्डा संचालन चाहती हैं। हम चाहते हैं कि हवाईअड्डों के मामले में दीर्घकालिक निवेश करें, जो उद्योग के लिए सस्ता हो।
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हादसों की रिपोर्ट न आने पर जताई निराशा
इससे पहले, विमान सुरक्षा को लेकर वाल्श ने कहा कि पिछले छह साल में हादसों की आधी से भी कम जांचों की अंतिम रिपोर्ट प्रकाशित की गई है। हादसों की रिपोर्ट से जानकारी का अभाव सुरक्षा के अवसरों की हानि है। पिछले वर्ष 40.6 मिलियन उड़ानों में से सात घातक दुर्घटनाएं हुईं तथा 4.8 अरब यात्रियों में 244 लोगों की मृत्यु हुई। वाल्श ने कहा कि पिछले 12 महीनों में संघर्ष क्षेत्रों में दो नागरिक विमान गिराए गए। सैन्य अभियानों में नागरिक विमानों वाले कई हवाई अड्डों पर बमबारी की गई। संघर्ष क्षेत्रों के निकट नेविगेशन प्रणालियों में हस्तक्षेप की घटनाओं में तेजी से वृद्धि हुई।
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