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IATA: विमानन क्षेत्र की मांग बढ़ने पर आईएटीए महानिदेशक ने जताई खुशी, कहा- उड़ान की लागत में आई 40 फीसदी की कमी

Mon, 02 Jun 2025 01:44 PM IST
बशु जैन बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दुनियाभर की 350 से अधिक विमानन कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले अंतरराष्ट्रीय वायु परिवहन संघ (आईएटीए) की वार्षिक बैठक 42 साल बाद भारत में हो रही है। इसमें आईएटीए के डीजी ने विमानन क्षेत्र की बढ़ती मांग-लागत के बीच लाभ और सुविधाओं को बेहतर करने पर जोर दिया। 
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आईएटीए के डीजी विली वाल्श। - फोटो : Linkedin/Willie Walsh
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विस्तार
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देश-दुनिया में विमानन क्षेत्र की मांग लगातार बढ़ रही है। यात्रियों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। इस पर वैश्विक एयरलाइन संघ आईएटीए के महानिदेशक विली वाल्श ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि लागत और कर चुनौतियां लगातार बढ़ने के बाद भी उड़ान की वास्तविक लागत एक दशक पहले की तुलना में 40 प्रतिशत कम हो गई है। इस बार हवाई यात्रियों की संख्या सालाना पांच अरब को पार कर जाने का अनुमान है। 42 साल बाद भारत में हो रही आईएटीए की वार्षिक बैठक में वाल्श ने कहा कि आपूर्ति श्रृंखला संबंधी समस्याओं के चलते एयरलाइन उद्योग की विकास दर धीमी हो गई है।
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विमान कंपनियों को होगा 36 अरब डॉलर का लाभ
दुनियाभर की 350 से अधिक विमानन कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले अंतरराष्ट्रीय वायु परिवहन संघ का अनुमान है कि कंपनियां 979 बिलियन अमेरिकी डॉलर के राजस्व पर 36 अरब अमेरिकी डॉलर का लाभ कमाएंगी। वाल्श ने कहा कि हमारा लाभ उस विशाल मूल्य के अनुरूप नहीं है जो हम एक मूल्य श्रृंखला के केन्द्र में सृजित करते हैं जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद के 3.9 प्रतिशत का समर्थन करती है तथा 86.5 मिलियन लोगों को रोजगार प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व में सबसे तेजी से बढ़ते नागरिक विमानन बाजारों में से एक है और हवाई यातायात की मांग बढ़ रही है। जबकि हवाई किराये के बारे में चिंताएं बनी हुई हैं।

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ऑर्डर और डिलीवरी के बीच 14 साल इंतजार
आईएटीए के महानिदेशक वाल्श ने कहा कि विमान के मामले में विनिर्माण क्षेत्र बुरी तरह विफल हो रहा है। 17000 डिलीवरी बैकलॉग का मतलब है कि ऑर्डर देने और डिलीवरी के बीच 14 साल का इंतजार। 2025 के लिए निर्धारित डिलीवरी की संख्या एक साल पहले किए गए वादे से 26 फीसदी कम है। उन्होंने कहा कि 10 वर्ष से कम आयु के 1,100 से अधिक विमान स्टॉक में हैं। यह पूरे बेड़े का 3.8 प्रतिशत है, जो कोरोना से पहले की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है। जबकि वार्षिक बेड़ा प्रतिस्थापन दर तीन प्रतिशत है।  उन्होंने कहा कि इससे राजस्व पर असर पड़ता है, क्योंकि कुछ मांग पूरी नहीं हो पाती। जबकि कमी के कारण रखरखाव और पट्टे की लागत बढ़ जाती है। यह स्वीकार्य नहीं है कि निर्माताओं का अनुमान है कि इस गड़बड़ी को सुलझाने में दशक के अंत तक का समय लग सकता है। 

एयरोस्पेस को व्यापार युद्ध से बाहर रखें
वाल्श ने एयरोस्पेस को व्यापार युद्धों से बाहर रखने की भी वकालत की। आईएटीए महानिदेशक ने कहा कि खराब विनियमन मूल्य को नष्ट कर सकता है तथा सामर्थ्य के रास्ते में बाधा उत्पन्न कर सकता है। किसी भी विनियमन के लिए लिटमस टेस्ट लागत-लाभ विश्लेषण है। हम इसे नियामकों की तुलना में अधिक गंभीरता से लेते हैं। वे अपने स्वयं के पैसे के साथ नहीं खेल रहे हैं और राजनीतिक सफलता और समस्या को हल करने के बीच का अंतर अक्सर बहुत बड़ा होता है। 
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हादसों की रिपोर्ट न आने पर जताई निराशा
विमान सुरक्षा को लेकर वाल्श ने कहा कि पिछले छह साल में हादसों की आधी से भी कम जांचों की अंतिम रिपोर्ट प्रकाशित की गई है। हादसों की रिपोर्ट से जानकारी का अभाव सुरक्षा के अवसरों की हानि है। पिछले वर्ष 40.6 मिलियन उड़ानों में से सात घातक दुर्घटनाएं हुईं तथा 4.8 अरब यात्रियों में 244 लोगों की मृत्यु हुई। वाल्श ने कहा कि पिछले 12 महीनों में संघर्ष क्षेत्रों में दो नागरिक विमान गिराए गए। सैन्य अभियानों में नागरिक विमानों वाले कई हवाई अड्डों पर बमबारी की गई। संघर्ष क्षेत्रों के निकट नेविगेशन प्रणालियों में हस्तक्षेप की घटनाओं में तेजी से वृद्धि हुई।

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