औद्योगिक उत्पादन बढ़ने की रफ्तार घटकर तीन माह के निचले स्तर पर
खनन और विनिर्माण क्षेत्रों के खराब प्रदर्शन से देश का औद्योगिक उत्पादन दिसंबर, 2024 में 3.2 फीसदी की दर से ही बढ़ा, जो इसका तीन माह का निचला स्तर है। इससे पहले सितंबर में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर सबसे कम 3.2 फीसदी रही थी, जबकि दिसंबर, 2023 में यह 4.4 फीसदी बढ़ा था।
इसके साथ ही सरकार ने नवंबर, 2024 के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) आंकड़े को भी संशोधित कर पांच फीसदी कर दिया है। पिछले महीने जारी अस्थायी अनुमान में इसे 5.2 फीसदी बताया गया था। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के मुताबिक, दिसंबर, 2024 में विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन तीन फीसदी बढ़ा, जो एक साल पहले की समान अवधि के 4.6 फीसदी से कम है। खनन क्षेत्र की वृद्धि दर 5.2 फीसदी से घटकर 2.6 फीसदी रह गई। बिजली, निर्माण/बुनियादी ढांचा, प्राथमिक और टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई है।
देश में 2030 तक 60 फीसदी बढ़ेगी प्राकृतिक गैस की खपत
देश में प्राकृतिक गैस की खपत 2030 तक 60 फीसदी बढ़ जाएगी। इस मांग को पूरा करने के लिए तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का दोगुना आयात करना पड़ेगा।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने कहा, तेज शहरीकरण और औद्योगिकीकरण के कारण भारत के ऊर्जा बाजार में बदलाव देखने को मिलेगा। इससे दशक के अंत तक और संभवतः उससे आगे गैस की मांग बढ़ेगी। हालांकि, इस दौरान घरेलू उत्पादन मांग की तुलना में बहुत धीमी गति से बढ़ने का अनुमान है, जिससे प्राकृतिक गैस का आयात बढ़ाना पड़ेगा। एजेंसी ने कहा, एक दशक की धीमी वृद्धि और समय-समय पर गिरावट के बाद भारत की प्राकृतिक गैस की मांग पिछले दो वर्षों में 10 फीसदी से अधिक बढ़ गई है। 2030 तक भारत की गैस मांग बढ़कर 103 अरब क्यूबिक मीटर (बीसीएम) प्रति वर्ष हो जाएगी। अगर सरकार इस क्षेत्र के लिए अतिरिक्त नीतिगत सहायता देती है, तो 2030 तक सालाना मांग 120 बीसीएम तक पहुंच सकती है।
घरेलू उत्पादन में 8 फीसदी बढ़ोतरी का अनुमान
एजेंसी के मुताबिक, 2030 तक भारत का घरेलू गैस उत्पादन 8 फीसदी बढ़कर 38 बीसीएम प्रति वर्ष होने की उम्मीद है। इसका मतलब है कि भारत को दशक के अंत तक सालाना आयात दोगुना कर लगभग 65 बीसीएम करना होगा।