भारत के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ लॉन्च करने की तैयारी सिर्फ एक कारोबारी फैसला नहीं, बल्कि महीनों तक चली एक बेहद गोपनीय रणनीति का हिस्सा था। दावा किया जा रहा है कि इस मिशन को रिलायंस ने प्रोजेक्ट जुपिटर नाम दिया, जिसके तहत सीमित लोगों की टीम, कागजी दस्तावेज, बंद कमरे की बैठकों और बदलते बाजार हालात के बीच जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयर बाजार तक पहुंचाने की पूरी योजना तैयार की गई।
आइए जानते हैं कि कैसे बना भारत के सबसे बड़े आईपीओ का मास्टरप्लान? इस मिशन की जानकारी किसे थी? प्रोजेक्ट जुपिटर के दौरान क्या हुआ? इसके लिए कितनी लंबी तैयारी करनी पड़ी और क्या-क्या बदलाव किए गए?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल अगस्त में रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष मुकेश अंबानी ने शेयरधारकों को एक वादा किया। उन्होंने कहा कि जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड शेयर बाजार में 2026 की पहली छमाही में सूचीबद्ध हो जाएगा। इसके बाद अंबानी ने जियो के आईपीओ को लेकर एक गुप्त प्लान बनाया। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने बंद कमरों में जियो के मेगा आईपीओ की तैयारी शुरू कर दी थी। कंपनी के सामने तीन बड़ी चुनौतियां थी।