वर्तमान दौर में हम गला काट प्रतियोगिता के दौर से गुजर रहे हैं। इस वजह से प्रदर्शन और लक्ष्य हासिल करने को लेकर बहुत तनाव है। एक ओर कर्मचारी शिकायत करते हैं कि उन्हें अवास्तविक लक्ष्य दिये जाते हैं, जिन्हें हासिल करना असंभव है, जबकि दूसरी तरफ नियोक्ताओं को लगता है कि कर्मचारी अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं।
अक्सर यह कहा जाता है कि ‘रोम एक दिन में नहीं बना था’ या यह भी कि हजार मील की यात्रा पहले कदम के साथ शुरू होती है। आमतौर पर, लोगों को पूरे एक साल के लिए बहुत बड़ा लक्ष्य दिया जाता है। इसके बजाय, कम अंतराल के लिए छोटे लक्ष्य दें, तो निश्चित ही लोग इन्हें हासिल करने योग्य पाएंगे और इन्हें पूरा करने का प्रयास करेंगे।
मेरे एक असाइनमेंट के दौरान मैंने अपने लोगों से कहा कि वे अपने प्रदर्शन को प्रति माह केवल पांच फीसदी बढ़ाएं। इस प्रक्रिया में, उनमें से कुछ ने एक वर्ष के भीतर अपने प्रदर्शन को दोगुना कर दिया। इस फार्मूले के परिणामस्वरूप कम्पाउंडेड ग्रोथ हुई। प्रदर्शन में लगातार सुधार होगा, और इस तरह कर्मचारी अंतिम लक्ष्य को प्राप्त करेगा।
नियमित रूप से छोटी उपलब्धियों का जश्न मनाएं क्योंकि यह लोगों के अंतर्मन और मनोबल को ऊंचा रखती है और लोग प्रेरणा के कारण और मान्यता की प्रत्याशा में बेहतर प्रदर्शन करते हैं।
प्रदर्शन में सुधार के लिए परामर्शक की भूमिका निभाना और अग्रणी होना बहुत महत्वपूर्ण है और व्यक्ति के व्यक्तित्व को आकार देने में भी मदद करता है। उचित परामर्श से शानदार परिणाम प्राप्त करने में मदद मिलती है।
शक्तियां सौंपने से सशक्तिकरण आता है, जो एक बार फिर से बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करता है। यदि हम अपने लोगों को शक्तियां सौंपते हैं और उन्हें सशक्त बनाते हैं और यदि कार्यों को एक संरचित तरीके से वितरित किया जाता है, तो इससे संगठन का समग्र प्रदर्शन और बेहतर हो जाएगा।
हमारे काम करने के तरीके में भी एक छोटा सा बदलाव समग्र प्रदर्शन में बहुत सुधार ला सकता है। नवाचार के लिए हमेशा किसी महान वैज्ञानिक खोज की तरह प्रयास करने की जरूरत नहीं होनी चाहिए, बल्कि कार्यों को पूरा करने के लिए नए और बेहतर तरीके भी आजमाये जा सकते हैं।
यदि हम अपने कर्मचारियों की चुनौतियों का सम्मान करते हैं, तो वे निश्चित रूप से अधिक निष्ठा और प्रदर्शन के साथ जवाब देंगे और अधिक कार्य करने के लिए प्रेरित होंगे।