अमेरिकी कोर्ट का बड़ा झटका
नवंबर 2023 में एक अमेरिकी अदालत ने लेंडर्स के पक्ष में फैसला देते हुए कहा कि 1.2 अरब डॉलर का कर्ज लेने वाली विशेष इकाई (SPV) में लेंडर्स द्वारा निदेशक नियुक्त करना उचित था। अदालत ने सीईओ के भाई रिजु रवींद्रन को एसपीवी बोर्ड से हटाने के फैसले को भी सही ठहराया।
रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2025 में अमेरिकी अदालत ने विवादित 533 मिलियन डॉलर से जुड़े मामले में लगभग 1.07 अरब डॉलर का डिफॉल्ट जजमेंट जारी किया, जिसने कंपनी के संकट को निर्णायक मोड़ दे दिया। इसके साथ ही क्रेडिटर्स ने कंपनी के सह-संस्थापकों पर फंड के दुरुपयोग और छिपाने के आरोप लगाते हुए कानूनी कार्रवाई तेज कर दी।
भारत में भी बढ़ी मुश्किलें
अमेरिका के साथ-साथ भारत में भी कंपनी पर दबाव बढ़ा। बीसीसीआई के बकाया भुगतान को लेकर मामला एनसीएलटी तक पहुंचा और 2024 में दिवालियापन से जुड़ी कार्यवाही शुरू हुई। इस दौरान बड़े पैमाने पर छंटनी हुई और कर्मचारियों की संख्या 2022 के लगभग 60,000 से घटकर 2024 तक करीब 14,000 रह गई।
आक्रामक विस्तार और लागत नियंत्रण की कमी का आरोप
पूर्व अधिकारियों के अनुसार, कंपनी ने अधिग्रहण और ब्रांडिंग पर अत्यधिक खर्च किया, जबकि लागत नियंत्रण और स्थायी राजस्व मॉडल पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। कई फैसले अत्यधिक आशावाद के आधार पर लिए गए, जिससे नकदी संकट गहराता गया।
निवेशकों का भरोसा टूटा, वैल्यूएशन ढहा
लगातार गिरते वैल्यूएशन और कानूनी दबाव के बीच कंपनी अब करीब 200 मिलियन डॉलर की नई फंडिंग जुटाने की कोशिश कर रही है, जिसकी संभावित वैल्यूएशन मात्र 250 मिलियन डॉलर बताई जा रही है। लगातार घाटे, देरी से वित्तीय खुलासे और कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़े सवालों ने निवेशकों का विश्वास कम किया। कुछ शुरुआती निवेशकों ने ऊंचे वैल्यूएशन पर अपनी हिस्सेदारी बेच दी, जबकि अन्य को भारी नुकसान उठाना पड़ा।