सऊदी अरब के दो तेल प्लांट्स पर ड्रोन हमले के दो दिन बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतों में सोमवार को 20 फीसदी तक की उछाल देखने को मिली, जो वर्ष 1991 में खाड़ी युद्ध के बाद किसी एक कारोबारी सत्र की सबसे बड़ी तेजी रही है। इस हमले का असर इतना ज्यादा था कि इससे सऊदी अरब का तेल उत्पादन घटकर आधा रह गया।
इसका असर घरेलू बाजार पर भी होगा और आने वाले कुछ दिनों में पेट्रोल व डीजल की कीमतें पांच से सात रुपये प्रति लीटर तक बढ़ सकती हैं।
घरेलू खुदरा बाजार में तेल वितरण करने वाली सरकारी कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के चेयरमैन एमके सुराणा ने कहा कि अगर क्रूड के दाम मौजूदा स्तर पर भी बने रहते हैं, तो भी पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ानी पड़ेंगी। क्रूड के दाम में 10 फीसदी का इजाफा होने पर घरेलू खुदरा कीमतों और असर पड़ सकता है। हालांकि, उन्होंने अनुमान जताया कि वैश्विक बाजार में क्रूड के दाम में आया उछाल अस्थायी है।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि सऊदी अरब ने उत्पादन घटने के बावजूद भारत को तेल आपूर्ति में कमी नहीं करने का भरोसा दिया है। भारत को तेल आपूर्ति करने के मामले में सऊदी अरब इराक के बाद दूसरे पायदान पर है। मंत्रालय ने बताया कि सऊदी अरामको ने भारत की रिफाइनरी कंपनियों को आश्वस्त किया है कि उन्हें तेल आपूर्ति में कोई कटौती नहीं की जाएगी। दरअसल, भारत अपनी तेल जरूरतों का 83 फीसदी आयात करता है। 2018-19 में आयात किए गए कुल 207.3 मिलियन टन तेल में से 40.33 मिलियन टन तेल सऊदी अरब से आया था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कच्चे तेल के उत्पादन में गिरावट को देखते हुए रिजर्व तेल के इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है। ट्रंप ने ट्वीट किया, अरामको पर हमले के बाद तेल कीमतों पर प्रभाव पड़ सकता है। मैंने बाजारों को अच्छी आपूर्ति रखने के लिए रिजर्व तेल के इस्तेमाल की मंजूरी दी है। मैंने सभी उपयुक्त एजेंसियों को टेक्सास और अन्य राज्यों में वर्तमान में तेल पाइप लाइनों के विस्तार में तेजी लाने को कहा है। अगर बाजार में तेल निर्यात करना पड़ा, तो उसके लिए भी अमेरिका तैयार है। अमेरिका में स्ट्रेटजिक पेट्रोलियम रिजर्व नाम से दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडारण क्षेत्र है।