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New Income Tax Bill: 'आसान नियम, ज्यादा छूट, अधिक बचत', जानिए नया टैक्स कानून मध्यमवर्ग के लिए कैसे फायदेमंद

Tue, 12 Aug 2025 01:52 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

नया आयकर विधेयक 2025 लोकसभा से पारित हो गया। आइए समझते हैं कि इस बील में क्या है खास? क्या बदलाव हुए है और नागरिकों को इससे क्या फायदा होगा?
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निर्मला सीतारमण - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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नया आयकर विधेयक 2025 सोमवार को लोकसभा से पारित हो गया। अब इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने के बाद देश में 64 वर्ष बाद नया टैक्स लॉ लागू हो जाएगा। नए बिल को छह दशक पुराने आयकर अधिनियम, 1961 की जगह लेने के लिए 13 फरवरी को पेश किया गया था 

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ये भी पढ़ें: New Income Tax Bill: लोकसभा में हंगामे के बीच बिना चर्चा के दोनों कर विधेयक पारित, विपक्ष ने जताया विरोध

31 सदस्यों वाली संसदीय प्रवर समिति ने पिछले महीने अपने 4,575 पृष्ठों के विस्तृत निष्कर्ष प्रस्तुत किए। उनकी सिफारिशों में छोटे-मोटे समायोजन और 32 महत्वपूर्ण संशोधन शामिल हैं। पुराने 47 अध्यायों और 819 धाराओं को घटाकर अब 23 अध्याय और 536 धाराएं रखी गई हैं। इससे एनआरआई सहित सभी करदाताओं के लिए नियम समझना और पालन करना आसान होगा।
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नए विधेयक में क्या हुए बदलाव और क्या है इसके फायदे?

  • मध्यमवर्ग के लिए राहत- नई कर व्यवस्था अब डिफॉल्ट होगी। बेसिक छूट सीमा 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 4 लाख रुपये की गई है। सेक्शन 87A के तहत टैक्स रिबेट ₹25,000 से बढ़ाकर ₹60,000 कर दिया गया है। इससे 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं देना होगा। स्टैंडर्ड डिडक्शन 75,000 रुपये बना रहेगा। इन बदलावों से मध्यवर्ग की जेब में सालाना लगभग 1.14 लाख रुपये तक की बचत हो सकती है।
  • रिफंड का दावा करना होगा असान - करदाता रिटर्न देर से दाखिल करने की स्थिति में भी रिफंड का दावा कर सकते हैं।
  • टीडीएस फाइल करने में देरी पर कोई जुर्माना नहीं - टीडीएस फाइल करने में देरी होने पर कोई वित्तीय जुर्माना नहीं लगेगा। किराया, ब्याज, डिविडेंड, कमीशन और प्रोफेशनल फीस जैसे कई मदों में TDS/TCS की सीमा दोगुनी या उससे अधिक की गई है। इससे छोटे लेनदेन पर टैक्स कटौती की जरूरत घटेगी और करदाताओं के हाथ में ज्यादा पैसे रहेंगे।
  • शून्य-टीडीएस प्रमाणपत्र - जिन करदाताओं पर कर देयताएं नहीं हैं, यानी वे आयकर नहीं देते, वे अग्रिम रूप से 'शून्य प्रमाणपत्र' का दावा कर सकते हैं। यह भारतीय और अनिवासी दोनों करदाताओं पर लागू होता है।
  • कम्यूटेड पेंशन - कुछ करदाताओं के लिए कम्यूटेड पेंशन, एकमुश्त पेंशन भुगतान पर स्पष्ट रूप से कर कटौती होगी (पहले के मसौदे में इसका अप्रत्यक्ष उल्लेख था)। यह उन लोगों पर लागू होता है जो एलआईसी पेंशन फंड जैसे विशिष्ट फंडों से पेंशन प्राप्त करते हैं।
  • अंतर-कॉर्पोरेट लाभांश - अंतर-कॉर्पोरेट लाभांश, यानी किसी कंपनी को किसी अन्य कंपनी में रखे गए शेयरों से प्राप्त होने वाले लाभांश के लिए कटौती को धारा 80एम के तहत बहाल कर दिया गया है।
  • एनआरआई के लिए स्थिर नियम- टैक्स रेजिडेंसी नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आरएनओआर (Resident but Not Ordinarily Resident) स्टेटस और मौजूदा टैक्स दरें बदली नहीं गई हैं। निवेश आय और पूंजीगत लाभ पर टीडीएस लागू रहेगा, लेकिन अगर पहले से कटौती हो चुकी है, तो रिटर्न भरने की अनिवार्यता नहीं होगी।
  • कर वर्ष की अवधारणा- प्रस्तावित परिवर्तनों और संशोधनों में एक 'कर वर्ष' की अवधारणा भी शामिल है, जो 'वित्तीय वर्ष' या FY और 'लेखा वर्ष' या AY के एक साथ इस्तेमाल की जगह लेगी।
  • एमएसएमई को मिलेगा बढ़ावा- सरकार के चार विकास इंजान कृषि, MSME, निवेश और निर्यात को गति देने का साधन है। मध्यमवर्ग की क्रयशक्ति बढ़ाने, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और वैश्विक निवेश आकर्षित करने के लिए यह महत्वपूर्ण कदम है।
  • निवेश और स्टार्टअप्स को बढ़ावा- IFSC इकाइयों को टैक्स में रियायतों की समयसीमा 2030 तक बढ़ाई गई है। संप्रभु संपत्ति कोष (SWF) और पेंशन फंड्स की इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश पर टैक्स छूट भी 2030 तक मिलेगी। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप्स के लिए नए प्रावधान जोड़े गए हैं।
  • संपत्ति कर स्पष्टीकरण - गृह संपत्तियों से आय पर कर की गणना करने के लिए, धारा 21 के तहत निर्धारित मानक कटौती 30 प्रतिशत निर्धारित की गई है। संपत्ति खरीदने, निर्माण करने, मरम्मत करने आदि के लिए उधार ली गई पूंजी पर देय ब्याज भी काटा जाएगा।

पुराने कानून के तहत, किराये की संपत्ति के पूरे वर्ष या उसके कुछ भाग के लिए खाली रहने की स्थिति में, मकान का वार्षिक मूल्य (जिस पर कर की गणना की जाती थी) 'उचित अपेक्षित किराये' या वास्तविक प्राप्त किराये (वर्ष के कुछ भाग के लिए) पर आधारित होता था, जब तक कि वह 'उचित' किराये से कम हो। नए कानून के तहत, यह मूल्यांकन दो योगों में से जो अधिक हो, उस पर आधारित होगा।  'उचित अपेक्षित किराया' या वास्तविक प्राप्त/प्राप्ति योग्य किराया, अगर संपत्ति या उसका कोई भाग किराये पर दिया गया हो।

आयकर विनियमों को सुव्यस्थित और सरल करने का उद्देश्य
आयकर विधेयक, 2025 प्रस्तुत करते हुए, वित्त मंत्री सीतारमण ने बताया कि इस कानून का उद्देश्य मौजूदा आयकर अधिनियम के स्थान पर आयकर विनियमों को सुव्यवस्थित और सरल करना है। इस प्रस्ताव में एक संशोधित संरचना, डिजिटल कराधान के प्रावधान, विवादों के समाधान की प्रणालियां और तकनीकी एवं डेटा-संचालित विधियों के माध्यम से कर संग्रह का विस्तार करने की पहल शामिल हैं।

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अग्रिम कर के कम भुगतान पर ब्याज संबंधी प्रावधान में संशोधन जारी
वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को आयकर विधेयक में अग्रिम कर के कम भुगतान पर ब्याज संबंधी प्रावधान में संशोधन जारी किया। संशोधन के तहत, अग्रिम कर के कम भुगतान पर 3% ब्याज लगाने का प्रावधान किया गया है। यह प्रावधान आयकर अधिनियम, 1961 में पहले से मौजूद नियमों के अनुरूप है। इसके तहत अब 10,000 रुपये या उससे अधिक की कर देयता वाले करदाताओं को चार किस्तों में अग्रिम कर का भुगतान करना होगा। इसकी तिथि है 15 जून, 15 सितंबर, 15 दिसंबर और 15 मार्च। 
 

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