सोने-चांदी में उतार-चढ़ाव लगातार जारी हैं। इसकी मुख्य वजह अस्थिर वैश्विक भू-राजनीति और व्यापारिक तनाव है। लेकिन इसके अलावा भी कई और कारणों की वजह से भी इन कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव देखा गया। इसमें चांदी ने पिछले कई वर्षों से निवेशकों और रिटेल खरीदारी को चौकाया है।
जिन प्रमुख कारकों ने 2025 में चांदी की कीमतों को बढ़ाया वहीं प्रमुख कारक 2026 में भी इन्हें बढ़ाने का काम करेंगे। तेजी से डिजिटलीकरण, एआई के विस्तार और डेटा केंद्रों व आईटी बुनियादी ढांचे के साथ कंप्यूटिंग और इलेक्ट्रिक सिस्टम में चांदी का इस्तेमाल बढ़ने से इसकी मांग बढ़ रही है।
वहीं दूसरी ओर चांदी की सीमित भौतिक आपूर्ति, भू-राजनीतिक अस्थिरिता और अमेरिकी व्यापार नीतियों की अनिश्चितता की वजह से बुलियन में सुरक्षित निवेश के आकर्षण को बनाए रखा है। जबकि सोने में मजबूती से चांदी के लिए गिरावट के रिस्क को कम करने में मदद मिलेगी, भले ही जल्द ही कीमतों में अधिक उतार-चढ़ाव की संभावना है।
जियोजित इंवेस्टमेंट के अनुसार 2025 में शानदार 146 प्रतिशत का रिटर्न देने के बाद, जनवरी में चांदी कई ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई और पहली बार 100 अमेरिकी डॉलर के मुख्य मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर चली गई। इस तेज बढ़त ने सोन और चांदी के रेश्यों को 50 से अधिक कर दिया, जो 2012 के बाद इसका सबसे निचला स्तर है। हालांकि चांदी बाद में 63.00 के करीब वापस आ गई। 2025 में चांदी की कीमतों को बढ़ाने वाले कारक इस साल 2026 में भी मजबूत बने हुए हैं। जिसमें लंदन में भौतिक आपूर्ति में कमी, भू-राजनीतिक उतार-चढ़ाव, अमेरिका में पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता कीमती धातु को सहारा दे रहे हैं। इसके अलावा चांदी की फंडामेंटल आपूर्ति और मांग का संतुलन कंस्ट्रक्विट बना हुआ है।
सैमको सिक्योरिटीज के अनुसार 2023 से अब तक चांदी की कहानी तीन चरणों में आगे बढ़ी है।
सैमको सिक्योरिटीज के विशेषज्ञों के अनुसार निवेशकों को लंबी अवधि के लिए अपना नजरिया रखना चाहिए। निवेशकों को जल्दबाजी से बचना चाहिए और संतुलित एसेट एलोकेशन करें। क्योंकि जब डॉलर कमजोर होता है और लिक्विडिटी बेहतर होती है, तब चांदी अच्छा प्रदर्शन करती है। अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार निवेश करने की जरूरत है, साथ ही बीच-बीच में कीमतों में उतार-चढ़ाव तैयार रहना भी जरूरी है।