पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों का असर भारत की जीडीपी पर भी पड़ सकता है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी आईसीआरए ने संभावना जताई कि अगर इस संघर्ष से कच्चे तेल की कीमतों में प्रति बैरल 10 डॉलर की बढ़ोतरी होती है, तो भारत के शुद्ध तेल आयात में लगभग 13 से 14 डॉलर की वृद्धि होगी। इससे भारत का चालू खाता घाटा (सीएडी) सकल घरेलू उत्पाद के 0.3 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। चालू खाता घाटा एक देश के चालू खाते में आयात और निर्यात के बीच असंतुलन को दर्शाता है। यह वह स्थिति है जब निर्यात से अधिक आयात पर खर्च होता है।
रिपोर्ट में बताया गया कि यह ईरान और इस्राइल के बीच यह संघर्ष 13 जून 2025 को शुरू हुआ। इसने कच्चे तेल की कीमतों को 64 से 65 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 74 से 75 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा दिया है। अमेरिका की एंट्री के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा की है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति में बाधा आ सकती है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। लगभग 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल और वैश्विक तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) शिपमेंट का एक तिहाई हिस्सा प्रतिदिन यहां से गुजरता है। यह लगभग 30 मील चौड़ा है और ईरान और ओमान के बीच स्थित है।
आईसीआरए ने उम्मीद जताई कि तेल कीमतों में वृद्धि का असर केवल आयात बिल तक सीमित नहीं रहेगा। इससे थोक मूल्य सूचकांक (WPI) में 80 से 100 आधार अंक और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में 20 से 30 आधार अंक तक की वृद्धि हो सकती है।
आईआरसीए के अनुसार जून 2025 में भारत की आर्थिक गतिविधयों ने मिले-जुले संकेत दिए हैं। जून माह में बिजली की मांग में सुधार के संकेत मिले, फिर भी दैनिक औसत वाहन पंजीकरण में गिरावट जारी रही। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में दोपहिया वाहनों और ट्रैक्टरों की मांग में वृद्धि होने की उम्मीद है। साथ ही, आयकर में कटौती और कम उधारी लागत से शहरी मांग को लाभ मिल सकता है। हालांकि उत्पाद की उपलब्धता एक चुनौती बनी हुई है। पिछले महीने भारत की आर्थिक गतिविधि सालाना आधार पर 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर पर आ गई। वहीं, मई 2025 में कोर सेक्ट के उत्पादन में 0.7 प्रतिशत की सुस्त वृद्धि दर्ज की गई। यह नौ महीने का सबसे निचला स्तर है।