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हेल्थ बीमा: यही तो चाहिए था बुजुर्गों को, IRDAI का बड़ा फैसला; प्रीमियम में सालाना बढ़ोतरी अब सिर्फ 10% तक

Mon, 03 Nov 2025 07:05 AM IST
शुभम कुमार बिजनेस डेस्क, अमर उजाला।

सार

क्या आप भी इससे परेशान थे कि हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां बुजुर्गों के लिए सालाना प्रीमियम मनमाने ढंग से बढ़ा देती थीं। नई बीमारी पर सम इंश्योर्ड राशि कम कर देती थीं या क्लेम देने में नखरे करती थीं। एक तो बुजुर्गों को आसानी से बीमा नहीं मिलता, ऊपर से महंगा इलाज और कंपनियों की मनमानी। जीवन की सांझ में सीमित आय के बीच हेल्थ बीमा सुविधा नहीं सांसत बन गया था।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बीमा क्षेत्र में दो ताजा बदलाव हुए हैं-एक तो जीएसटी खत्म होने से पॉलिसियां सस्ती हुईं और दूसरा बीमा नियामक यानी IRDAI ने बीमा कंपनियों को नए नियमों में बांधा है, खासतौर पर बुजुर्गों के लिए। वार्षिक प्रीमियम में मनचाही वृद्धि नहीं यह सेवानिवृत्त लोगों के लिए बड़ी राहत है। भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने तय किया है कि बुजुर्गों की चालू हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के वार्षिक प्रीमियम में अधिकतम 10 प्रतिशत तक ही वृद्धि की जा सकती है।  
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वार्षिक प्रीमियम की सीमा तय होने से क्या होगा...  
  •  वरिष्ठ नागरिकों को अनियंत्रित  प्रीमियम बढ़त से बचाया जा सकेगा।
  •  वरिष्ठ नागरिकों व पेंशनर्स के लिए  बीमा कवर जारी रखना आसान होगा।  
  •  रिटायरमेंट इनकम की तुलना में लागत अधिक होने के कारण पॉलिसी लैप्स होने की आशंका कम होगी।  
  •  नो-क्लेम बोनस, वेटिंग पीरियड पूरा होने जैसे लाभ सुरक्षित रहेंगे।
  •  रिटायरमेंट के बाद निश्चित आय के साथ बजट और लंबी अवधि की वित्तीय योजना बनाना आसान होगा।

तय समय में क्लेम सेटलमेंट
IRDAI ने क्लेम सेटलमेंट को तेज बनाने के लिए भी कई बदलाव किए हैं। क्लेम प्रक्रिया में देरी अब बीमाधारकों की जिम्मेदारी नहीं होगी। ऐसे में नए नियमों के अनुसार:
  • आपात स्थितियों में कैशलेस क्लेम पर निर्णय एक घंटे के भीतर लेना होगा।
  • अस्पताल से डिस्चार्ज के लिए अंतिम मंजूरी तीन घंटे में देनी होगी।
  • रीइंबर्समेंट क्लेम 30 दिनों में निपटेगा, और जांच की स्थिति में 45 दिन में।
  • कंपनी समय-सीमा से चूकती है, तो उसे बीमाधारक को ब्याज देना होगा।
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मैटेरियल चेंज क्लॉज स्पष्ट
  • यह पेचीदा, मगर जरूरी बदलाव है।  कई लोगों को यह डर रहता था कि बीमा वर्ष के बीच में नई बीमारी आने पर मैटेरियल चेंज क्लॉज के कारण पॉलिसी के नवीनीकरण पर प्रीमियम बढ़ सकता है, सम इंश्योर्ड घट सकता है या पॉलिसी की शर्तें बदल सकती हैं। अब IRDAI ने इसे भी स्पष्ट कर दिया है।
  • नई बीमारियों के आधार पर नवीनीकरण पर जोखिम का पुनर्मूल्यांकन या प्रीमियम नहीं बढ़ेगा।  
  • सम इंश्योर्ड में वृद्धि बीमाधारक की इच्छा पर ही होगी।
  • प्रीमियम में किसी भी बढ़ोतरी के लिए नियामक की मंजूरी जरूरी होगी।
  • जीवनभर नवीनीकरण का अधिकार
  • पॉलिसी खरीदने के बाद नई बीमारी का पता चलने पर पॉलिसीधारकों को पॉलिसी देने से इन्कार नहीं किया जा सकता या दंड नहीं लगाया जा सकता।  
किसी भी आयु में मिलेगा बीमा
IRDAI ने हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने की अधिकतम आयु-सीमा को भी खत्म कर दिया है। इसका मतलब है कि अब कोई भी वयस्क व्यक्ति, चाहे उसकी उम्र कितनी भी हो, हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीद सकता है। अधिकतम प्रवेश आयु सीमा हटाए जाने से वरिष्ठ नागरिकों के लिए चिकित्सा सुरक्षा बढ़ेगी। भारत की तेजी से बूढ़ी होती आबादी की स्वास्थ्य देखभाल के लिए यह कदम महत्वपूर्ण है।
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