मुंबई और अहमदाबाद के बीच कुल 508.17 किलोमीटर रेल ट्रैक में से लगभग 21 किलोमीटर भूमिगत होने की योजना है। भूमिगत सुरंग का एक प्रवेश बिंदु विक्रोली (गोदरेज के स्वामित्व वाली) की भूमि पर पड़ता है।
बंबई उच्च न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना ''राष्ट्रीय महत्व की और जनहित में'' है। कोर्ट ने यह कहते हुए गोदरेज एंड बॉयस कंपनी की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति आर डी धानुका और न्यायमूर्ति एमएम सथाये की खंडपीठ ने कहा कि यह परियोजना अपनी तरह की अनूठी है और इसका पूरा होना निजी हितों पर सामूहिक हित की जीत होगी।
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मुंबई और अहमदाबाद के बीच कुल 508.17 किलोमीटर रेल ट्रैक में से लगभग 21 किलोमीटर भूमिगत होने की योजना है। भूमिगत सुरंग का एक प्रवेश बिंदु विक्रोली (गोदरेज के स्वामित्व वाली) की भूमि पर पड़ता है। राज्य सरकार और नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) ने दावा किया था कि कंपनी पूरी परियोजना में देरी कर रही है जो सार्वजनिक महत्व की है।
अधिकारियों ने उच्च न्यायालय को बताया था कि विक्रोली इलाके में गोदरेज एंड बॉयस मैन्युफैक्चरिंग कंपनी लिमिटेड के स्वामित्व वाली भूमि को छोड़कर मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए पूरी लाइन के अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए मुंबई के विक्रोली इलाके में कंपनी के स्वामित्व वाली भूमि के अधिग्रहण को लेकर कंपनी और सरकार के बीच 2023 से कानूनी विवाद चल रहा है।
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उच्च न्यायालय की पीठ ने कहा कि उसे मुआवजे या अधिकारियों द्वारा शुरू की गई कार्यवाही में कोई गड़बड़ी नहीं मिली है। उन्होंने कहा, ''यह परियोजना राष्ट्रीय महत्व की और जनहित में है। हमें मुआवजे में कोई गड़बड़ी नहीं मिली है। यह सर्वोपरि सामूहिक हित है जो प्रबल होगा, न कि निजी हित।