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जीएसटी रिटर्न का नया खाका तैयार: 1 नवंबर से कारोबारियों की राय मांगेगी सरकार, जानिए नए नियमों से क्या बदलेगा?

Thu, 22 Oct 2026 06:06 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

  • वित्त मंत्रालय 1 नवंबर से 'मायगॉव' पोर्टल पर संशोधित जीएसटी रिटर्न फॉर्म पर कारोबारियों और विशेषज्ञों से सुझाव मांगेगा।
  • इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) मिसमैच घटाने, नोटिस कम करने के लिए नई व्यवस्था बनेगी जो अप्रैल 2027 से लागू होगी।
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57वीं जीएसटी काउंसिल की मीटिंग के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण व अन्य। - फोटो : ANI
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विस्तार
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देश की अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुगम और करदाता-अनुकूल बनाने की दिशा में केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के जीएसटी पॉलिसी विंग के कमिश्नर गौरव सिंह ने जानकारी दी है कि वित्त मंत्रालय 1 नवंबर से मासिक जीएसटी रिटर्न फॉर्म में प्रस्तावित संशोधनों पर कारोबारियों और उद्योग जगत से सुझाव आमंत्रित करेगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कर देनदारियों और इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) में होने वाले मिसमैच को कम करना और करदाताओं को गैरजरूरी टैक्स नोटिसों से राहत दिलाना है।

वित्त मंत्रालय जीएसटी रिटर्न फॉर्म में क्या बड़ा बदलाव करने जा रहा है?

सीबीआईसी के सीनियर अधिकारी गौरव सिंह के अनुसार, संशोधित जीएसटी रिटर्न फॉर्म को 1 नवंबर को सरकार के 'मायगॉव' पोर्टल पर सार्वजनिक परामर्श के लिए अपलोड किया जाएगा। देश भर के व्यवसायी, उद्योग संगठन और टैक्स पेशेवर 1 नवंबर से लेकर 30 नवंबर तक इस पर अपने सुझाव व टिप्पणियां दर्ज करा सकेंगे। 

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इसके साथ ही, 8 अक्तूबर को आयोजित जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों से जुड़ी अधिसूचनाओं और परिपत्रों की विधि विभाग की ओर से जांच पूरी कर ली गई है और उन्हें शुक्रवार को सार्वजनिक पटल पर जारी कर दिया जाएगा।

57वीं जीएसटी काउंसिल बैठक में किन नए नियमों को मंजूरी दी गई थी?

केंद्रीय वित्त मंत्री और राज्यों के वित्त मंत्रियों वाली 57वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में जीएसटी रिटर्न में देनदारियों और इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) में संशोधन के लिए एक वैकल्पिक तंत्र को हरी झंडी दी गई थी। इस व्यवस्था का मुख्य लक्ष्य रिटर्न दाखिल करते समय विवरण में होने वाले बेमेल को कम करना और कर अधिकारियों द्वारा जारी की जाने वाली सूचनाओं व नोटिसों की संख्या में भारी कटौती करना है।

काउंसिल ने मासिक टैक्स भुगतान फॉर्म GSTR-3B में रिपोर्ट किए गए ब्योरे के साथ बेहतर मिलान सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित फॉर्मों में सुधार व संवर्धन को मंजूरी दी है:

  • GSTR-1: बाहरी आपूर्ति (Outward Supplies) का विवरण देने वाला मासिक फॉर्म।
  • GSTR-1A: फॉर्म GSTR-1 में संशोधन या छूट गए ब्योरे को जोड़ने की सुविधा देने वाला फॉर्म।
  • आईएफएफ (IFF - Invoice Furnishing Facility): क्यूआरएमपी योजना के तहत करदाताओं के लिए चालान प्रस्तुत करने की सुविधा।

आईटीसी की विसंगतियां दूर होने से करदाताओं को क्या फायदा होगा?

जीएसटी प्रणाली की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) है। गौरव सिंह ने स्पष्ट किया कि एक बार जब आईटीसी श्रृंखला की सत्यनिष्ठा और अखंडता से जुड़े मुद्दे सुलझ जाएंगे, तो इससे माल और सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था में और अधिक संरचनात्मक सुधारों को गति मिलेगी। 

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फॉर्म GSTR-1/1A/IFF के डेटा का GSTR-3B के साथ सटीक मिलान होने से फर्जी आईटीसी दावों पर प्रभावी रोक लगेगी और ईमानदार करदाताओं को बार-बार मिलने वाले स्क्रूटनी नोटिस से मुक्ति मिलेगी।

जीएसटी ऑडिट की प्रक्रिया में क्या सुधार किया जाएगा?

मौजूदा व्यवस्था में एक से अधिक राज्यों में काम करने वाली कंपनियों को प्रत्येक राज्य के जीएसटी अधिकारियों द्वारा अलग-अलग और कई बार ऑडिट (Multiple Audits) की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इस दोहरेपन और प्रशासनिक दबाव को समाप्त करने के लिए सीबीआईसी ऑडिट प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने पर काम कर रहा है।

गौरव सिंह ने कहा कि ऑडिट की समीक्षा की आवश्यकता है ताकि पूरी प्रक्रिया इस तरह तैयार की जा सके कि करदाताओं को किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या असुविधा का सामना न करना पड़े।

नए जीएसटी रिटर्न फॉर्म कब से लागू होंगे?

सार्वजनिक परामर्श की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, संशोधित जीएसटी रिटर्न फॉर्म 1 अप्रैल, 2027 से लागू किए जाएंगे। यह समयसीमा कारोबारियों और आईटी सॉफ्टवेयर डेवलपर्स को नए रिपोर्टिंग सिस्टम के अनुसार अपनी लेखा प्रणाली में आवश्यक तकनीकी बदलाव करने का पर्याप्त अवसर प्रदान करेगी।

1 नवंबर से शुरू हो रहा सार्वजनिक परामर्श यह दर्शाता है कि सरकार नीति निर्धारण में उद्योग जगत की भागीदारी को प्राथमिकता दे रही है। रिटर्न फॉर्म में स्वचालित मिलान और ऑडिट प्रक्रिया के सरलीकरण से न केवल ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि देश में कर अनुपालन का ढांचा भी अधिक मजबूत होगा।

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