वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि जीएसटी अधिकारियों ने दिल्ली स्थित एक गिरोह का पर्दाफाश किया है जिन्होंने 229 फर्जी जीएसटी पंजीकृत फर्मों के जाल के माध्यम से 645 करोड़ रुपये के आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) का फर्जीवाड़ा किया है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीआई) दिल्ली जोनल यूनिट ने दिल्ली में कई स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान बड़ी मात्रा में संदिग्ध दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और खाताबही बरामद की गईं। कई अस्तित्वहीन फर्में केवल बिल जारी करने के लिए बनाई गई थीं। अधिकारियों को तलाशी के दौरान 162 मोबाइल फोन (संभवतः जीएसटी/बैंकिंग ओटीपी प्राप्त करने के लिए उपयोग किए गए), 44 डिजिटल सिग्नेचर और 200 से अधिक चेकबुक्स मिलीं।
प्रारंभिक जांच से पता चला है कि इन फर्जी संस्थाओं के जरिए बिना किसी वास्तविक आपूर्ति के बिल जारी किए जा रहे थे, जिससे लगभग 645 करोड़ रुपये का फर्जी आईटीसी लाभ लिया गया, जिससे सरकार को भारी राजस्व हानि हुई है। यह पूरा घोटाला दिल्ली स्थित एक सिंडिकेट द्वारा संचालित 229 डमी जीएसटी पंजीकृत फर्मों के नेटवर्क के माध्यम से किया गया।
जांच से पता चला कि एक प्रमुख साजिशकर्ता, मुकेश शर्मा, फर्जी संस्थाओं के इस नेटवर्क के संचालन का संचालन करता था। शर्मा को 11 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था। मंत्रालय ने एक बयान में कहा, जांच में एक संभावित धन-शोधन घटक भी सामने आया है, जिसमें धोखाधड़ी की आय कथित तौर पर एक गैर सरकारी संगठन और एक राजनीतिक संगठन के माध्यम से घुमाई गई थी।