Supreme Court: किसी वस्तु या सेवा की खरीद लाभ कमाने के लिए की जाती है तो क्रेता को उपभोक्ता नहीं माना जा सकता और इस कारण वह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत मामला नहीं चला सकता। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में यह बात कही। अदालत ने फैसले में आगे क्या कहा, आइए विस्तार से जानें।
किसी वस्तु या सेवा की खरीद लाभ कमाने के लिए की जाती है तो क्रेता को उपभोक्ता नहीं माना जा सकता और इस कारण वह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत मामला नहीं चला सकता। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में यह बात कही।
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न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने मेसर्स पॉली मेडिक्योर लिमिटेड द्वारा दायर अपील पर फैसला सुनाते हुए राज्य और राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोगों के निष्कर्षों की पुष्टि की कि कंपनी द्वारा दायर शिकायत अधिनियम के तहत विचारणीय नहीं थी।
इसने कहा कि अपनी व्यावसायिक प्रक्रियाओं को स्वचालित करने के लिए सॉफ्टवेयर खरीदने वाली कंपनी को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत 'उपभोक्ता' नहीं माना जा सकता, क्योंकि ऐसा लेनदेन 'व्यावसायिक उद्देश्य' के लिए होता है।
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फैसला लिखते हुए न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा ने विभिन्न निर्णयों का हवाला दिया और कहा, "वस्तुओं/सेवाओं की खरीद के लेन-देन का संबंध लाभ के लिए था और इसलिए, उस लेन-देन के आधार पर अपीलकर्ता को 1986 के अधिनियम की धारा 2(1)(डी) में परिभाषित उपभोक्ता नहीं माना जा सकता।"
कंपनी की अपील को खारिज करते हुए न्यायालय ने कहा कि यदि लेन-देन का संबंध लाभ कमाने से है तो इसे वाणिज्यिक उद्देश्य से किया गया लेन-देन माना जाएगा। यह अपील चिकित्सा उपकरणों के निर्माता और निर्यातक पॉली मेडिक्योर लिमिटेड की ओर से 2019 में दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के समक्ष दायर की गई शिकायत से जुड़ी थी।