वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली लागू होने के बाद यह पहला रमजान होगा, जो 14 या 15 मई से शुरू हो जाएगा। इस एक महीने तक लोग अल्लाह की इबादत कर अमन की दुआ मांगेंगे। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार पूरे साल में यही एक महीना ऐसा होता है, जिसमें खर्च का हिसाब-किताब नहीं रखना होता है।
वरना तयशुदा खर्च के अनुपात में ही जकात आदि देनी होती है। केंद्र सरकार ने दावा किया था कि जीएसटी लागू होने के बाद कुछ चीजें सस्ती होंगी और आम आदमी को इसका सीधा लाभ मिलेगा। लेकिन 10 महीने बाद भी बाजार में जीएसटी से लाभ मिलता नहीं दिख रहा है। रमजान महीने में इस्तेमाल होने वाली कुछ खास वस्तुओं पर नजर डालें, तो अधिकांश में जीएसटी की दर बढ़ी है, जो पहले वैट में कम थी।
रमजान की वस्तुओं पर महंगाई की मार
धार्मिक वस्तुएं
- - कुरान रखने के लिए रहल पर 12 फीसदी जीएसटी, जबकि पहले इस पर वैट नहीं।
- - नॉन अल्कोहलिक इत्र पर 5 से 18 फीसदी जीएसटी, जबकि पहले सिर्फ पांच फीसदी कर
- - हाथ की बुनी टोपी पर अब 5 फीसदी कर, पहले कर मुक्त।
- - रेडीमेड टोपी पर अब 12 फीसदी कर, पहले 5 फीसदी वैट।
- - खजूर में पहले 5 फीसदी वैट, अब 12 फीसदी जीएसटी।
- - कुरान की कहानियों पर आधारित इलेक्ट्रॉनिक खिलौने और इलेक्ट्रॉनिक कुरान के गेम्स पर 12 से 18 फीसदी जीएसटी, जबकि पहले 12 से 16 फीसदी कर।
- -तस्बीह अब माला के नाम से आ रही है, क्योंकि माला है टैक्स फ्री।
खानपान की वस्तुएं
- - खुला हुआ कटा चिकन, मटन और बफैलो मीट टैक्स फ्री है, पैक्ड होने पर अब 12 फीसदी जीएसटी ।
- - सेवई, सूतफेनी पर पहले की तरह पांच फीसदी वैट की तर्ज पर ही जीएसटी।
कुछ वस्तुएं महंगी तो कुछ सस्ती
वाणिज्य कर के डिप्टी कमिश्नर अजय कुमार वर्मा ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद कुछ चीजों के दाम कम हुए, तो कुछ के बढ़े हैं। लोग टैक्स देकर ही सामान खरीदें, तो उनके लिए फायदेमंद है।
दिखेगा जीएसटी का असर
व्यापारी आसिफ जफर ने बताया कि रमजान शुरू होने में अभी वक्त है, इसलिए दुकानदारी अभी तक हल्की है, आने वाले दिनों में भी जीएसटी का असर दिखेगा।