सुधीर हालाखंडी का कहना है कि रिटर्न मासिक के बजाय एकल त्रैमासिक की व्यवस्था होनी चाहिए। सरकार चाहे तो मासिक चालान बनाते समय ही इनपुट-आउटपुट की राशि भरवा कर अंतिम कर निकलवा ले, ताकि डीलरों को मासिक जीएसटीआर-3बी से छुटकारा मिल जाए।
उनका कहना है कि सरकार अभी भी कारोबारियों पर विश्वास नहीं कर रही है, क्योंकि रिटर्न की अधिक संख्या एवं जानकारी की जटिलता कारोबारियों पर अविश्वास का परिचायक है। हालांकि, सच्चाई यह है कि अधिकतर कारोबारियों का कर चोरी से कोई संबंध नहीं है। इसलिए इसका सरलीकरण आवश्यक है।
रिफंड व्यवस्था से निर्यातक असंतुष्ट
जीएसटी रिफंड को लेकर कारोबारियों, खासकर निर्यातकों में भारी असंतोष है। निर्यातकों के संगठन फिओ के अध्यक्ष गणेश कुमार गुप्ता का कहना है कि जीएसटी की वजह से निर्यातकों का रिफंड समय से नहीं मिल पा रहा है।
इस वजह से उन्हें वर्किंग कैपिटल के लिए भी उधार लेना पड़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो रही है, वह अलग। हालांकि कारोबारियों की समस्या के समाधान के लिए सरकार ने दो बार रिफंड पखवाड़े का आयोजन किया है, लेकिन इसके वांछित परिणाम नहीं दिख रहे हैं। इसलिए जरूरी है कि सरकार इसके लिए कोई स्वचालित प्रणाली का विकास करे।
सरलीकरण दिशा में हो रहा काम
जीएसटी परिषद के सदस्य और बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने एक बार संवाददाताओं से बातचीत में स्वीकार किया था कि जीएसटी रिटर्न प्रक्रिया में सरलीकरण की गुंजाइश है और परिषद इस दिशा में काम कर रहा है। हो सकता है कि जीएसटी परिषद की अगली बैठक के दौरान इस बारे में कोई फैसला हो जाए।
वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि देश में जीएसटी तगड़े स्वरूप में लागू हुआ और साल भर में इसने सही तरीके से काम करना शुरू कर दिया। जबकि दुनिया के अन्य देशों में इसे सफल होने में कई साल लगे। एक दक्षिण एशियाई देश में तो इसे वापस भी लेना पड़ा, लेकिन यहां ऐसी नौबत नहीं आने वाली। इसमें अब दिनों-दिन सुधार ही होगा।