जीएसटी सुधारों का उद्देश्य खुदरा कीमतों को कम करना है। दोपहिया और छोटी कारों को इसका फायदा हो सकता है। सीमेंट क्षेत्र में राजस्व में वृद्धि हो सकती है। बढ़ती खपत से बैंकों को लाभ हो सकता है। इस आधार पर ब्रोकरेज हाउसों ने 40 से ज्यादा शेयरों को संभावित लाभार्थियों के रूप में पहचाना है। मॉर्गन स्टेनली के मुताबिक, दरों को युक्तिसंगत बनाने से अंतिम ग्राहकों के लिए कीमतों में कमी आएगी। इससे वे ज्यादा खर्च कर पाएंगे। दरों में कमी से निम्न-आय वाले परिवारों पर बोझ कम होगा। समग्र मांग में सुधार के रुझान से कारोबारी धारणा मजबूत होगी।
उपभोक्ता वस्तुएं व सीमेंट शेयरों से लाभ
मोतीलाल ओसवाल ब्रोकरेज हाउस का कहना है कि उपभोक्ता वस्तुओं (बेहतर मांग और कच्चे माल की कम लागत से) वाले शेयरों को इस फैसले से ज्यादा लाभ होगा। सीमेंट, होटल, खुदरा (फुटवियर), उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं व लॉजिस्टिक्स को भी फायदा होगा। ऐसे में हिंदुस्तान यूनिलीवर, ब्रिटानिया, मारुति, अशोक लेलैंड, अल्ट्राटेक, वोल्टास, लेमनट्री, स्विगी, एचडीएफसी बैंक और बजाज फाइनेंस भी पसंदीदा शेयर हैं।
2.4 लाख करोड़ रुपये बढ़ेगी खपत
ब्रोकरेज हाउसों का अनुमान है कि जीएसटी की दरों में कमी से 2.4 लाख करोड़ रुपये की खपत बढ़ सकती है। यह रकम देश के निम्न और मध्य वर्ग के लोगों के हाथों में आएगी। इससे वे अच्छा-खासा खर्च करने में सक्षम होंगे। खासकर दिवाली में और ज्यादा खर्च लोग करने को इच्छुक होते हैं। भारत वर्षों में अपनी सबसे बड़ी खपत वृद्धि के कगार पर खड़ा है।
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सितंबर में रफ्तार पकड़ सकता है बाजार
विश्लेषकों का मानना है कि जीएसटी दरों में कमी के फैसले से सितंबर से घरेलू शेयर बाजार रफ्तार पकड़ सकता है। पिछले कुछ महीने से बाजार में सुस्ती है। दरअसल, विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार भारतीय बाजार में शेयरों की बिकवाली कर रहे हैं।