जीएसटी परिषद शनिवार को राजस्थान के जैसलमेर में हो रही बैठक में जीवन और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर कर की दर कम करने, महंगी कलाई घड़ियों, जूतों और परिधानों पर कर की दर बढ़ाने और हानिकारक वस्तुओं के लिए अलग से 35 प्रतिशत कर स्लैब पर विचार करने पर विचार कर सकती है।
वहीं, इस्तेमाल की गई इलेक्ट्रिक गाड़ियों और छोटे पेट्रोल और डीजल वाहनों की बिक्री पर जीएसटी को मौजूदा 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत तक करने का भी प्रस्ताव रखा है। सूत्रों के अनुसार, इस बढ़ोतरी से इस्तेमाल की गई और पुरानी छोटी कारें व इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी की दरें पुराने बड़े वाहनों के बराबर हो जाएंगे। इसके अलावा, जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर पर मंत्रियों के समूह (जीओएम) को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए जून, 2025 तक छह महीने का विस्तार मिलने की संभावना है। क्षतिपूर्ति उपकर व्यवस्था मार्च, 2026 में समाप्त हो जाएगी, और जीएसटी परिषद ने उपकर का भविष्य तय करने के लिए केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के नेतृत्व में मंत्रियों का एक पैनल गठित किया है।
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में परिषद की ओर से गठित मंत्री समूह ने नवंबर में अपनी बैठक में टर्म लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसियों के लिए भुगतान किए जाने वाले बीमा प्रीमियम को जीएसटी से छूट देने पर सहमति जताई थी। इसके अलावा वरिष्ठ नागरिकों की ओर से स्वास्थ्य बीमा कवर के लिए भुगतान किए गए प्रीमियम को भी कर से छूट देने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके अलावा, वरिष्ठ नागरिकों के अलावा अन्य लोगों की ओर से 5 लाख रुपये तक के स्वास्थ्य बीमा भुगतान किए गए प्रीमियम पर जीएसटी में छूट देने का भी प्रस्ताव है।
हालांकि, 5 लाख रुपये से अधिक के स्वास्थ्य बीमा कवर वाली पॉलिसियों के लिए प्रीमियम भुगतान पर 18 प्रतिशत जीएसटी जारी रहेगा। परिषद जीएसटी दर युक्तिकरण पैनल की रिपोर्ट पर भी चर्चा करेगी। इसमें 148 वस्तुओं की दर में बदलाव का सुझाव दिया गया है।
जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाने के लिए गठित मंत्री समूह ने इस महीने की शुरुआत में परिषद के समक्ष अपनी सिफारिश प्रस्तुत करने का निर्णय लिया था। इसमें वातित पेय पदार्थों (कोल्ड ड्रिंक्स), सिगरेट, तंबाकू और इस तरह के हानिकारक उत्पादों कर को वर्तमान 28 प्रतिशत से बढ़ाकर 35 प्रतिशत करने का सुझाव दिया गया था। जीएसटी के तहत 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत की चार स्तरीय कर दरें जारी रहेंगी और मंत्रिसमूह की ओर से केवल हानिकारक वस्तुओं पर 35 प्रतिशत की नई दर लगाने का प्रस्ताव दिया गया है।
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में दरों को तर्कसंगत बनाने पर गठित मंत्रियों के समूह ने परिधानों पर कर दरों को तर्कसंगत बनाने का भी प्रस्ताव रखा है। निर्णय के अनुसार, 1,500 रुपये तक की लागत वाले तैयार कपड़ों पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगेगा, जबकि 1,500 रुपये से 10,000 रुपये तक की लागत वाले कपड़ों पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगेगा।
10,000 रुपये से अधिक कीमत वाले परिधानों पर 28 प्रतिशत कर लगेगा। वर्तमान में 1,000 रुपये तक के परिधानों पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगता है, जबकि इससे अधिक कीमत वाले परिधानों पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगता है। मंत्री समूह ने 15,000 रुपये प्रति जोड़ी से अधिक कीमत वाले जूतों पर जीएसटी की दर 18 प्रतिशत से बढ़ाकर 28 प्रतिशत करने का भी प्रस्ताव रखा है। 19 अक्तूबर को हुई पिछली बैठक में 25,000 रुपये से अधिक मूल्य की कलाई घड़ियों पर जीएसटी दर 18 प्रतिशत से बढ़ाकर 28 प्रतिशत करने का भी प्रस्ताव किया गया था।
मंत्री समूह ने 20 लीटर और उससे ज्यादा के बोतलबंद पानी पर जीएसटी को 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने और 10,000 रुपये से कम कीमत वाली साइकिलों पर कर की दर को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने का भी प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही, एक्सरसाइज नोटबुक पर जीएसटी को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव दिया गया है।
कुल मिलाकर, दरों को तर्कसंगत बनाने के लिए गठित मंत्रिसमूह ने जीएसटी परिषद को 148 वस्तुओं में कर दरों में बदलाव का प्रस्ताव दिया है। एक अधिकारी ने पहले कहा था, "दरों में बदलाव से शुद्ध राजस्व पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।" जीएसटी के तहत, आवश्यक वस्तुओं को या तो छूट दी गई है या उनपर सबसे कम स्लैब पर कर लगाया गया है, जबकि विलासिता वाली वस्तुओं पर सबसे अधिक स्लैब के तहत कर लागू है। कार, वाशिंग मशीन जैसी विलासिता की वस्तुओं और एयरेटेड वाटर व तंबाकू उत्पादों वाली वस्तुओं पर सबसे अधिक 28 प्रतिशत स्लैब के तहत कर लगाया जाता है।
जीएसटी परिषद की बैठक के दौरान एटीएफ को जीएसटी के दायरे में लाने के संबंध में परिषद की ओर से समयसीमा पर विचार-विमर्श करने और राज्यों के बीच आम सहमति बनाने की संभावना है। 1 जुलाई 2017 को जब जीएसटी लागू किया गया था, तो उस समय एक दर्जन से अधिक केंद्रीय और राज्य शुल्क लगते थे।
पांच वस्तुओं - "कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, पेट्रोल, डीजल और विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ)" को जीएसटी कानून में शामिल किया गया था, लेकिन यह निर्णय लिया गया कि बाद में इन्हें जीएसटी के तहत कर लगाया जाएगा। इसका मतलब यह हुआ कि केंद्र सरकार उन पर उत्पाद शुल्क लगाती रही, जबकि राज्य सरकारें वैट वसूलती रहीं। इन करों में समय-समय पर बढ़ोतरी की गई है।
पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी में शामिल करने से न केवल कंपनियों को इनपुट पर चुकाए गए कर को कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि देश में ईंधन पर टैक्सेशन में भी एकरूपता आएगी। एटीएफ को जीएसटी में शामिल करना विमानन कंपनियों की वित्त मंत्रालय से एक प्रमुख मांग रही है। कंपनियों का कहना है कि इससे लागत कम होगी क्योंकि वे इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा कर सकेंगी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण शनिवार को होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक के लिए जैसलमेर पहुंचीं। जैसलमेर हवाई अड्डे पर पहुंचने पर राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी और राज्य सरकार के अन्य अधिकारियों ने सीतारमण का स्वागत किया। राजस्थान के जैसलमेर पहुंचकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रियों के साथ बजट पूर्व परामर्श बैठक की।