देश के ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए साल 2025 ऐतिहासिक साबित हुआ है। जीएसटी 2.0 के लागू होने, कीमतों में कमी और त्योहारी सीजन के दौरान मजबूत मांग के चलते यात्री वाहनों की बिक्री ने नया रिकॉर्ड बनाया है। थोक स्तर पर 44.89 लाख से अधिक यात्री वाहन बिके, जो अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा है। इससे साफ है कि ऑटो उद्योग ने धीमी शुरुआत के बाद साल के अंत तक जबरदस्त रफ्तार पकड़ी।
सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में यात्री वाहनों की बिक्री 2024 के मुकाबले करीब पांच फीसदी बढ़ी है। 2024 में जहां 42,74,793 यात्री वाहन बिके थे, वहीं 2025 में यह आंकड़ा 44.89 लाख के पार चला गया। जीएसटी दरों में कटौती से वाहनों की कीमत घटी, जिससे मध्यम वर्ग और शहरी ग्राहकों की खरीदारी बढ़ी। त्योहारी महीनों में मांग ने उद्योग को मजबूत सहारा दिया।
किस सेगमेंट में कितनी बढ़ोतरी हुई?
यूटिलिटी वाहनों की मांग सबसे ज्यादा मजबूत रही। इस सेगमेंट की बिक्री सात फीसदी बढ़कर 29,54,279 इकाई पहुंच गई। एक साल पहले यह 27,49,932 इकाई थी। वहीं, यात्री कारों की बिक्री में मामूली 0.6 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई और कुल 13,79,884 कारें बिकीं। वैन की बिक्री भी 1.1 फीसदी बढ़कर 1,55,554 इकाई तक पहुंची। इससे साफ है कि ग्राहक ज्यादा स्पेस और फीचर्स वाले वाहनों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
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दोपहिया वाहनों की तस्वीर क्या कहती है?
- दोपहिया वाहन बाजार ने भी 2025 में नई ऊंचाई छुई।
- कुल बिक्री करीब पांच फीसदी बढ़कर 2.05 करोड़ इकाई पहुंच गई।
- स्कूटर की बिक्री में सबसे ज्यादा 12.7 फीसदी की तेजी रही और 75,23,678 स्कूटर बिके।
- मोटरसाइकिल की बिक्री 1.1 फीसदी बढ़कर 1,24,82,990 इकाई रही।
- मोपेड की बिक्री में 4.1 फीसदी की गिरावट आई और यह 4,93,971 इकाई पर सिमट गई।
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निर्यात और दिसंबर की रिकॉर्ड छलांग
सिर्फ घरेलू बाजार ही नहीं, बल्कि निर्यात के मोर्चे पर भी 2025 ऑटो उद्योग के लिए बेहतर रहा। सभी श्रेणी के वाहनों के निर्यात में दहाई अंकों की वृद्धि दर्ज की गई। दिसंबर 2025 में यात्री वाहनों की बिक्री सालाना आधार पर 26.8 फीसदी बढ़कर 3,99,216 इकाई पहुंच गई, जो साल की सबसे ऊंची मासिक बिक्री रही। इसी महीने दोपहिया वाहनों की बिक्री 39 फीसदी और तिपहिया वाहनों की बिक्री 17 फीसदी बढ़ी।
नीतिगत फैसलों से बदला माहौल
उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक, 2025 की शुरुआत में ऑटो सेक्टर आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों से जूझ रहा था। लेकिन आयकर राहत, रेपो दर में कटौती और जीएसटी 2.0 जैसे सुधारों ने मांग को मजबूत किया। जीएसटी दरों में कटौती से वाहन सस्ते हुए और उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ा। तिपहिया वाहनों की बिक्री 8 फीसदी बढ़कर 7,88,429 इकाई और वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री भी 8 फीसदी बढ़कर 10,27,877 इकाई पहुंच गई। इससे साफ है कि ऑटो उद्योग की रफ्तार आगे भी बनी रह सकती है।
सीआईआई ने सरकार से भारत की हरित हाइड्रोजन आकांक्षाओं पर की यह अपील
उद्योग लॉबी सीआईआई ने सरकार से मांग को बढ़ावा देने और एक जीवंत स्वच्छ अर्थव्यवस्था को सक्षम बनाने के लिए प्रोत्साहन के साथ ग्रीन हाइड्रोजन जनादेश जारी करने का आग्रह किया है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने सुझाव दिया कि प्रस्तावित ग्रीन हाइड्रोजन ब्लेंडिंग को रिफाइनिंग, उर्वरक और प्राकृतिक गैस जैसे विभिन्न क्षेत्रों में लागत-संतुलन तंत्र के साथ पेश किया जा सकता है।
ग्रीन हाइड्रोजन का व्यापक रूप से उपयोग करने वाले क्षेत्र बड़े पैमाने पर इसकी मांग को पूरा करने के लिए सबसे अच्छी स्थिति में हैं। हालांकि, ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रे हाइड्रोजन की लागत में काफी अंतर बना हुआ है। सीआईआई ने कहा, "प्रोत्साहनों द्वारा समर्थित हरित जनादेश इस आर्थिक बाधा को दूर करने में मदद करेंगे, उत्पादकों को निश्चितता प्रदान करेंगे और पैमाने की अर्थव्यवस्थाओं के माध्यम से लागत में तेजी से गिरावट लाने में सक्षम बनाएंगे।"
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