बिहार के उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री सम्राट चौधरी की ओर से राज्य विधानसभा में पेश की गई आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2023-24 के अनुसार, सूबे का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 15.5% बढ़कर 7.5 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार वास्तविक जीएसडीपी 2022-2023 में 10.6% बढ़कर 4.4 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट इशारा करती है कि राजधानी पटना और आसपास के इलाकों में तो खूब विकास हुआ है पर दूर-दराज के इलाके अब भी समृद्धि से दूर हैं और संघर्ष कर रहे हैं। पटना और बेगूसराय जैसे जिले में प्रति व्यक्ति आय के मामले में अव्वल हैं पर शिवहर, अररिया और किशनगंज जैसे जिले अब भी फिसड्डी हैं।
हवाई सफर करने वालों की संख्या में सात गुना इजाफा
आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़े कई क्षेत्रों में बिहार की प्रगति की ओर इशारा कर रहे हैं। राज्य में हवाई परिवहन का आकार 2011-12 के 30 करोड़ रुपये से सात गुना बढ़कर 2022-23 में 228 करोड़ रुपये हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार, "हवाई परिवहन क्षेत्र में पिछले वर्ष की तुलना में 2022-23 के दौरान 59% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई। सर्वेक्षण के अनुसार सभी तीन क्षेत्रों- प्राथमिक (कृषि), माध्यमिक (औद्योगिक) और तृतीयक (सेवाओं) के मामले में उच्चतम वृद्धि दर्ज किया गया।
शहरीकरण का ग्राफ भी तेजी से बढ़ रहा
कभी देश के पिछड़े राज्यों की गिनती में शुमार रहे बिहार में शहरीकरण का ग्राफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में तेजी से बढ़ा है। बिहार विधानसभा में सरकार की ओर से पेश आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2023-24 इस बात की पुष्टि करती है। रिपोर्ट के अनुसार बिहार में शहरीकरण की दर में 17.1% की तेज दर्ज की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पटना जिला सबसे अधिक शहरी आबादी वाला जिला है, जहां 44.3% लोग शहरी क्षेत्र में बसते हैं। आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, 2018-19 से 2022-23 के बीच नगर विकास परियोजनाओं की वार्षिक चक्रवृद्धि दर 27% रही जबकि इस दौरान आवास योजनाओं की वार्षिक चक्रवृद्धि दर 11% रही। आंकड़ों के अनुसार इस दौरान समग्र वार्षिक चक्रवृद्धि दर 17.1 प्रतिशत दर्ज की गई। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नगर विकास व आवास विभाग के लिए बजट राशि खर्च करना अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। वित्तीय वर्ष 2022-23 के बजट में इसके लिए कुल 4465.27 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया, जिसमें से केवल 2339.47 करोड़ रुपये ही खर्च किए जा सके हैं।
सामाजिक योजनाओं के क्रियान्वयन से लिंगानुपात सुधरा
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार देश की कुल जनसंख्या में बिहार की हिस्सेदारी 9.4 प्रतिशत है। 2011 की जनगणना के आधार पर देश की कुल जनसंख्या में बिहार की हिस्सेदारी 8.6 प्रतिशत थी, जो 2023 में बढ़कर 9.4 प्रतिशत हो गई है। 2011 से 2023 के दौरान बिहार में लिंगानुपात (स्त्री-पुरुष अनुपात) में भी सुधार हुआ है। बिहार में अनुमानित तौर पर अब प्रति एक हजार पुरुष पर 953 महिलाएं हैं। रिपोर्ट के अनुसार राज्य सरकार की सामाजिक योजनाओं के क्रियान्वयन से लिंगानुपात को सुधारने में मदद मिली है।
पटना-बेगूसराय सबसे समृद्ध, किशनगंज-लखीसराय पिछड़े
अर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार बिहार के पटना, बेगूसराय, मुजफ्फरपुर, शेखपुरा, भोजपुर और सारण सबसे विकसित जिला हैं। वहीं अररिया, शिवहर, बांका, किशनगंज और लखीसराय पिछड़े जिले हैं। बिहार का सबसे अमीर जिला पटना और सबसे गरीब शिवहर जिला है। अमीरी के मामले में दूसरे नंबर पर बेगूसराय और तीसरे स्थान पर मुंगेर जिला है। गरीबी के मामले में दूसरे नंबर पर अररिया और तीसरे पर सीतामढ़ी है।
प्रति व्यक्ति आय के मामले में शिवहर सबसे फिसड्डी जिला
अर्थिक सर्वेक्षण में प्रति व्यक्ति आप के हिसाब से 38 जिले की रैकिंग बताई गई है। राज्य में औसत प्रति व्यक्ति आय 53,637 रुपये है, पटना में यह 1,14,541 रुपये है। बेगूसराय में प्रति व्यक्ति आय 46,991 और मुंगेर में 44176 रुपये है। रिपोर्ट के अनुसार शिवहर, अररिया और सीतामढ़ी में अमीरी-गरीबी के बीच का अंतर काफी अधिक है। शिवहर में जिले में प्रति व्यक्ति आय सबसे कम 18,980 रुपये है। अररिया में यह 19,795 रुपये और सीतामढ़ी में 21,448 रुपये है। पटना में प्रति व्यक्ति आय बिहार के सबसे गरीब जिले शिवहर की तुलना में लगभग छह गुना से अधिक है।