फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Report: भारत में ग्रीन हाइड्रोजन होगा 40 प्रतिशत सस्ता, सरकार की नीतियों से लागत में बड़ी गिरावट की संभावना

Wed, 11 Jun 2025 03:01 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में ग्रीन हाइड्रोजन की लागत में आने वाले समय में बड़ी गिरावट हो सकती है। भारत ने 2030 के अंत तक 5 मिलियन टन की हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। 
विज्ञापन
ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत में ग्रीन हाइड्रोजन की लागत में 40 प्रतिशत तक गिरावट आने की संभावना है। इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंशियल एनालिसिस की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया कि अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े लक्ष्य रखने वाले भारत में ग्रीन हाइड्रोजन की लागत कम हो सकती है। यह गिरावट सरकार के समर्थन से होगा। ग्रीन हाइड्रोजन बनाने की औसत लागत धीरे-धीरे गिरकर ₹260 से ₹310 प्रति किलोग्राम के बीच आ सकती है, यानी लगभग 3 से 3.75  डॉलर प्रति किलोग्राम। 

हाइड्रोजन निर्माताओं को दी गई ये रियायतें

भारत हाइड्रोजन निर्माताओं को सस्ती अक्षय बिजली प्रदान करते आ रहा है, ओपन एक्सेस के लिए अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन शुल्क माफ किया है और वितरण और ट्रांसमिशन शुल्क कम किया गया है। साथ ही,  हाइड्रोजन के लिए जीएसटी दर को घटाकर 5 प्रतिशत किया गया है। 

इलेक्ट्रोलाइजर की लागत में भी 7 प्रतिशत की गिरावट की संभावना 

इसके अलावा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इलेक्ट्रोलाइजर निर्माताओं के कुल सिस्टम लागत में 7 से 10 प्रतिशत की गिरावट आएगी। इलेक्ट्रोलाइजर एक ऐसा उपकरण है जो बिजली का उपयोग करके पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में अलग करता है।

हरित हाइड्रोजन उद्योग में इन सुधारों की जरूरत 

रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही हरित हाइड्रोजन योजना भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन दीर्घकालिक निवेश और परियोजना को बढ़ावा देने के लिए इसमें सुधार की जरूरत है। इसमें कहा गया कि भारत में हरित हाइड्रोजन मिशन को उद्योग जगत ने उत्साह के साथ अपनाया है। हालांकि, इस क्षेत्र में स्टार्टअप को आकर्षित करने और वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धी बनने के लिए आपूर्ति श्रृंखला बनाने और मांग को सुरक्षित करने की  योजना को बेहतर बनाना होगा।  अगर यह सफल रहा, तो यह कृषि, परिवहन और विनिर्माण सहित कई क्षेत्रों के लिए लाभ पहुंचाएगा। साथ ही, भारत के हरित हाइड्रोजन उद्योग को बनाने में मदद कर सकता है। 

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन योजना 

भारत ने जनवरी 2023 में राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन शुरू किया। इसकी शुरुआत 19,744 के कुल परिव्यय के साथ हुई। 2030 के अंत तक 5 मिलियन टन की हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता हासिल करने का लक्ष्य है। 

क्या है भारत की पंचामृत प्रतिज्ञा?

2021 में आयोजित COP26 में भारत ने एक महत्वाकांक्षी "पंचामृत" प्रतिज्ञा के लिए प्रतिबद्धता जताई। आइए जानते हैं क्या है वो पांच प्रतिज्ञा।

  1. 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता तक पहुंचना
  2. नवीकरणीय स्रोतों से सभी ऊर्जा आवश्यकताओं का आधा उत्पादन करना
  3. 2030 तक 1 बिलियन टन उत्सर्जन कम करना
  4. सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता को 45 प्रतिशत तक कम करना
  5. भारत 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के लिए प्रतिबद्ध
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें