बजट 2026 की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। इस बीच कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एलान किया है कि सरकार अगले साल की शुरुआत में संसद के बजट सत्र के दौरान बीज की गुणवत्ता पर नियंत्रण रखने के लिए कड़े प्रावधानों वाला विधेयक पेश करने की योजना बना रही है।
किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) पर एक कार्यक्रम में बोलते हुए चौहान ने कहा कि कानून में संशोधन का मकसद किसानों को गुणवत्तापूर्ण इनपुट सुनिश्चित करना है। मंत्री ने कहा कि देश की लगभग 46 प्रतिशत आबादी अब भी अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर है और किसानों को बेहतर आय सुनिश्चित करना सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है।
घटिया बीजों की बिक्री और वितरण की जांच के लिए होंगे कड़े प्रावधान
चौहान ने कहा, "हम संसद के बजट सत्र (2026 की शुरुआत में) में बीज कानून लाने जा रहे हैं।" उन्होंने कहा कि घटिया गुणवत्ता वाले बीजों की बिक्री और वितरण की जांच के लिए कड़े प्रावधान होंगे। उन्होंने कहा कि आनुवंशिक रूप से संशोधित बीजों की अनुमति नहीं है और बेहतर किस्मों की इजात के लिए अनुसंधान जारी है। केन्द्र सरकार के स्तर पर बीज अधिनियम में संशोधन पर सक्रिय रूप से काम चल रहा है, लेकिन अभी तक इसे औपचारिक रूप से अधिनियमित या कानून के रूप में अधिसूचित नहीं किया गया है।
हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों ने अपने-अपने बीज अधिनियमों में किया है सुधार
सरकार बीज की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और घटिया या नकली बीजों की बिक्री पर लगाम लगाने के लिए अनिवार्य ट्रेसेबिलिटी, प्रमाणीकरण और गुणवत्ता नियंत्रण प्रावधान लागू करने पर विचार कर रही है। इस बीच, हरियाणा और पंजाब समेत कुछ राज्यों ने 2025 में अपने-अपने बीज अधिनियमों में स्वतंत्र रूप से संशोधन किया है। इन बदलावों के तहत उल्लंघन के लिए कठोर दंड और प्रवर्तन उपायों को बढ़ावा दिया गया है।
देश में ़10 लाख एफपीओ से 53 लाख किसान जुड़े
चौहान ने कहा कि बेहतर लाभ सुनिश्चित करने के लिए सरकार एकीकृत खेती को बढ़ावा देगी। किसानों को कृषि के साथ-साथ मुर्गीपालन और डेयरी जैसी सहायक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। फिलहाल देश भर में 10 लाख एफपीओ हैं जिनसे 53 लाख किसान जुड़े हैं। इनमें से 1,100 एफपीओ ने 1 करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार किया है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य 2 करोड़ किसानों को एफपीओ में लाना है। दिल्ली में हुए इस कार्यक्रम में 24 राज्यों और 140 जिलों के 500 से अधिक प्रगतिशील किसानों, एफपीओ, कार्यान्वयन एजेंसियों और क्लस्टर-आधारित व्यावसायिक संगठनों ने भाग लिया।