केंद्र सरकार कुछ इस्तेमाल न किए जा रहे हवाई अड्डों को विशेष आर्थिक क्षेत्र में बदलने पर विचार कर रही है। वहां एयरक्राफ्ट लीजिंग कंपनियां अपने जहाज को पार्क कर संभावित ग्राहकों को दिखा सकेंगी। नागरिक उड्डयन सचिव आरएन चौबे ने कहा कि इसके अलावा, सरकार घरेलू उड्डयन क्षेत्र को अधिक आकर्षक बनाने के लिए एयरक्राफ्ट को लीज पर देने की लागत कम करने की संभावनाएं तलाशेगी।
15 जून को जारी की गई नई उड्डयन नीति में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने और लीजिंग की लागत कम करने की बात कही गई है। इससे इस पहल में मदद मिलेगी। नागरिक उड्डयन मंत्रालय एयरक्राफ्ट की पार्किग के मकसद के लिए इस्तेमाल में न लाए जा रहे हवाई अड्डों का उपयोग करने की संभावनाओं पर विचार करेगी। इसके अलावा यहां प्लेन को तोड़ने के लिए एयरोड्रोम्स का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। देश में लगभग 400 ऐसे हवाई अड्डे और हवाई पट्टियां हैं जिनका मौजूदा समय में इस्तेमाल नहीं हो रहा है।
उन्होंने कहा कि मैं किसी से मिला और उन्होंने कहा कि हमारे देश में तमाम हवाई अड्डे हैं। क्या हमारे लिए उनमें से कुछ को विशेष आर्थिक क्षेत्र के रूप में घोषित करना और दो चीजों के लिए अनुमति देना संभव है।
दुनिया भर की लीजिंग कंपनियां आएं और अपने एयरक्राफ्ट को पार्क करें। हम पानी के जहाज को तोड़ने के लिए अच्छा कर रहे हैं और वे कह रहे थे कि क्या हम हवाई जहाज को तोड़ने में कुछ कर सकते हैं? इन विचारों को उत्साहजनक बताते हुए उन्होंने कहा कि उड्डयन क्षेत्र को जोखिम रहित बनाने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए।
उन्होंने सतर्कता की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि हालांकि भारतीय उड्डयन क्षेत्र की ग्रोथ शानदार है लेकिन यह सुनिश्चित किए जाने की जरूरत है कि उड्डयन क्षेत्र ग्रोथ कर्व से आगे रहे। उनके अनुसार, उड्डयन क्षेत्र में ग्रोथ से जुड़ी कई चुनौतियां हैं।