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गेहूं के आयात पर 25 फीसदी का शुल्क अब जून तक

Wed, 30 Mar 2016 01:53 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली

सार

  • किसानों को सही दाम दिलाने के लिए सरकार का फैसला
  • अगले महीने से गेहूं की नई फसल की आवक आरंभ हो जाएगी
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गेंहू
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विस्तार
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गेहूं किसानों के हितों की रक्षा के लिए सरकार ने गेहूं आयात पर लगने वाले शुल्क की अवधि को आगामी 30 जून के लिए बढ़ा दिया है। इस माह की 31 तारीख को गेहूं आयात पर लगने वाले 25 फीसदी के शुल्क की अवधि समाप्त हो रही थी।
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अंतरारष्ट्रीय बाजार में गेहूं की कीमत अपेक्षाकृत कम होने के कारण आयात शुल्क हटने से गेहूं के आयात में काफी बढ़ोतरी की संभावना जाहिर की जा रही थी। आयात बढ़ने से किसानों को गेहूं के मिलने वाले दाम के प्रभावित होने की आशंका थी। अगले महीने से गेहूं की नई फसल की आवक आरंभ हो जाएगी। भारत चीन के बाद सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है। 

सरकार की तरफ से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि गेहूं आयात पर लगने वाले 25 फीसदी के शुल्क की अवधि को आगामी 30 तक के लिए बढ़ाया जाता है। पिछले साल अगस्त में सरकार की तरफ से गेहूं आयात पर 10 फीसदी का शुल्क लगाया गया था। गत वर्ष अक्तूबर में 10 फीसदी के इस शुल्क को बढ़ाकर 25 फीसदी कर दिया गया जो आगामी 31 मार्च तक के लिए मान्य था।
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गेहूं का आयात मुख्य रूप से दक्षिण भारत की आटा मिलों की तरफ से किया जाता है। गेहूं कारोबारियों के मुताबिक अगले तीन महीने तक बाजार में गेहूं की भारी उपलब्धता होगी। ऐसे में दक्षिण भारत की आटा मिलें उत्तर भारत 19.50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से गेहूं की खरीदारी कर पाएंगे। इस दौरान आस्ट्रेलिया से गेहूं का आयात करने पर उन्हें 21.50 रुपये प्रति किलोग्राम की कीमत देनी होगी।

गेहूं कारोबारियों ने बताया कि सरकार के इस फैसले से गेहूं की नई फसल की मांग दक्षिण भारत से भी रहेगी। हाल ही में कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा था कि 2015-16 में 920-930 लाख टन गेहूं का उत्पादन हो सकता है। पहले 938 लाख टन गेहूं के उत्पादन का अनुमान लगाया गया था, लेकिन बेमौसम की बारिश व ओलावृष्टि की वजह से गेहूं उत्पादन में थोड़ी कमी आ सकती है। कृषि मंत्रालय का मानना है कि कम आयात शुल्क से घरेलू बाजार में गेहूं की कीमत में कमी आएगी और इससे किसानों को नुकसान होगा क्योंकि थोक कारोबारी कम कीमत पर ही खरीदारी करना पसंद करते हैं।
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