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Government Guidelines: अब बिना अनुमति नहीं कर पाएंगे झींगा और समुद्री मछली पालन, सरकार ने तय किए सख्त नियम

Wed, 02 Jul 2025 09:11 PM IST
हिमांशु चंदेल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Government Guidelines: केंद्र सरकार ने देशी झींगा और समुद्री मछली पालन को लेकर नई गाइडलाइन जारी की हैं। इनके तहत हैचरी और फार्म के संचालन के लिए पंजीकरण जरूरी होगा। जल शुद्धिकरण, बीमारी की सूचना देना और रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है। नियम तोड़ने पर कार्रवाई होगी। इन कदमों का उद्देश्य सुरक्षित और नियंत्रित मछली उत्पादन को बढ़ावा देना है।

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मछली पालन पर सरकार सख्त - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने झींगा और समुद्री मछली (फिनफिश) पालन को नियंत्रित करने के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत झींगा और मछली की बीज उत्पादन इकाइयों (हैचरी) और फार्मों के संचालन के लिए नियम बनाए गए हैं। इसका मकसद समुद्री और खारे पानी में पाले जाने वाले देशी झींगा और मछलियों के पालन को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना है।
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मछली पालन विभाग ने 26 जून को 'देशी झींगा के बीज उत्पादन और पालन के लिए हैचरी और फार्म गाइडलाइन 2025' अधिसूचित की। इसके तहत जो भी हैचरी देशी झींगा के बीज उत्पादन में लगी हैं या लगना चाहती हैं, उनके पास जैव सुरक्षा और क्वारंटीन की सुविधाएं होनी चाहिए। ऐसे हैचरी ही पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकती हैं। पंजीकरण 'कोस्टल एक्वाकल्चर अथॉरिटी एक्ट 2005' और 'कोस्टल एक्वाकल्चर अथॉरिटी रूल्स 2024' के तहत किया जाएगा।

सैनिटरी नियम भी होंगे लागू
नई गाइडलाइन में साफ कहा गया है कि हैचरी में सिर्फ वही कर्मचारी प्रवेश कर सकेंगे, जिन्हें वहां काम करने की अनुमति होगी। किसी भी बीमारी के प्रकोप की स्थिति में तुरंत प्राधिकरण को सूचना देनी होगी। हैचरी में पानी का संग्रह, उपचार और अपशिष्ट जल के निस्तारण के भी नियम तय किए गए हैं।
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फार्म संचालन के लिए सख्त शर्तें
देशी झींगा पालन करने वाले सभी फार्म को भी प्राधिकरण से अनुमति लेनी होगी। उन्हें केवल अधिकृत हैचरी से परीक्षण और प्रमाणित बीज ही खरीदना होगा। साथ ही, फार्म में सुरक्षा के पूरे इंतजाम करने होंगे, जैसे कि चारदीवारी, जल उपचार के लिए तालाब, पक्षियों से सुरक्षा के उपाय और हर तालाब के लिए अलग उपकरण रखने होंगे।

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प्रशिक्षित स्टाफ जरूरी
नई गाइडलाइन में स्पष्ट किया गया है कि फार्म का संचालन ऐसे कर्मचारी करेंगे, जिन्हें जैव सुरक्षा प्रबंधन की ट्रेनिंग या अनुभव होगा। इससे झींगा और मछली में बीमारी फैलने की संभावना को कम किया जा सकेगा। इसके अलावा, किसानों को बीज खरीदने वाली हैचरी का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा।

समुद्री मछलियों के लिए भी नियम
देशी झींगा के अलावा, समुद्री मछलियों (फिनफिश) के बीज उत्पादन और पालन के लिए भी 2025 की गाइडलाइन जारी की गई है। यह गाइडलाइन 30 जून को अधिसूचित हुई। इसमें भी हैचरी और फार्म के संचालन, बीज की गुणवत्ता, बीमारी की रोकथाम और जैव सुरक्षा से जुड़े नियम शामिल हैं।

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सजावटी समुद्री जीवों पर भी नजर
इसके अलावा, मछली पालन विभाग ने समुद्री या खारे पानी में रहने वाले सजावटी जीवों के बीज उत्पादन और पालन के लिए भी 2025 की गाइडलाइन जारी की है। इन जीवों के पालन में भी साफ-सफाई, जैव सुरक्षा और गुणवत्ता बनाए रखने पर जोर दिया गया है।

सरकार का कहना है कि इन गाइडलाइन का मकसद देशी झींगा और मछलियों के उत्पादन को बढ़ावा देना और उनके संरक्षण को सुनिश्चित करना है। साथ ही, इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और किसानों की आमदनी में भी इजाफा होगा।

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