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Foodgrain: अल नीनो के डर से सरकार ने 2026-27 का खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य घटाया, जानिए क्या कारण

Tue, 29 Sep 2026 08:13 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अल नीनो की आशंकाओं के बीच सरकार ने 2026-27 के लिए खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य घटाकर 373.93 दस लाख टन किया। राज्यों के साथ मिलकर फसल पैटर्न बदलने और कम पानी वाली फसलें उगाने पर जोर। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं। 
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अल नीनो। - फोटो : ANI
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विस्तार
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सरकार ने अल नीनों की आशंका को देखते हुए अनाज उत्पादन का लक्ष्य घटा दिया है। केंद्र ने मंगलवार को बताया कि 2026-27 फसल वर्ष (जुलाई-जून) के लिए अनाज उत्पादन का लक्ष्य घटाकर 373.93 मिलियन टन कर दिया गया है। फसल वर्ष 2026-27 के वास्तविक उत्पादन 376.56 मिलियन टन की तुलना में यह करीब 2.63 मिलियन टन कम है। हालांकि इस बार का लक्ष्य 2025-26 के लिए रखे गए लक्ष्य 362 मिलियन टन से अधिक है।

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2026-27 के कुल लक्ष्य में खरीफ सीजन के लिए 196.21 दस लाख टन और रबी फसल सीजन के लिए 177.72 दस लाख टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य है। मंत्री चौहान ने राष्ट्रीय सम्मेलन में मीडिया को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अल नीनो की वैज्ञानिक समीक्षा के आधार पर यह लक्ष्य तय हुआ है। सरकार ने पानी की उपलब्धता और मिट्टी की नमी को ध्यान में रखा है। प्रतिकूल परिस्थितियों में फसल पैटर्न बदलने के लिए राज्यों से परामर्श भी किया गया है। उर्वरकों की उपलब्धता पर्याप्त है, और रबी सीजन के लिए पर्याप्त आपूर्ति होगी। 2026-27 के लिए कुल उर्वरक आवश्यकता 380 लाख टन अनुमानित है।

अल नीनो से निपटने की क्या है योजना?

रबी की बोआई के लिए अल नीनो की चुनौतियों पर विचार किया जा रहा है। खरीफ सीजन में कुछ हिस्सों में सूखे और बाढ़ का सामना करना पड़ा था। सरकार का लक्ष्य है कि कम वर्षा वाले क्षेत्रों में पानी की अधिक खपत वाली फसलें न उगाई जाएं। इसके बजाय, उन क्षेत्रों में दालें और तिलहन जैसी फसलें उगाने का इरादा है। वैश्विक पूर्वानुमानों के अनुसार अल नीनो 2026 के अंत तक बहुत मजबूत हो सकता है। सरकार राज्यों के साथ फसलों और किस्मों पर विस्तृत चर्चा कर रही है।

क्या है खरीफ सीजन की स्थिति?

मंत्री ने कहा कि अल नीनो, सूखे और बाढ़ की चिंताओं के बावजूद खरीफ खाद्यान्न उत्पादन में बड़ी गिरावट नहीं आएगी। सरकार ने अप्रैल से ही व्यापक तैयारी के उपाय शुरू कर दिए थे। कुछ फसलों के लिए खरीफ बोआई क्षेत्र में कमी आई है। हालांकि, कुल बोआई क्षेत्र पिछले वर्ष के लगभग बराबर है। वर्तमान में वर्षा की कमी करीब 12 फीसदी है। सूखे की स्थिति तब मानी जाती है जब कमी 20 फीसदी से अधिक हो।

किन राज्यों में सूखे की चिंता?

धान के बोआई क्षेत्र में करीब 16.32 लाख हेक्टेयर की सबसे अधिक कमी आई है। मक्का, सोयाबीन और कपास के क्षेत्र में भी कमी दर्ज की गई है। उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी, मूंग और अरहर के क्षेत्र में वृद्धि हुई है। यह दालों और मोटे अनाजों की ओर बदलाव का संकेत देता है। महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में बोआई क्षेत्र में कमी आई है। इन राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ से करीब 6.11 लाख हेक्टेयर फसलें प्रभावित हुई हैं। कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश (रायलसीमा सहित), तेलंगाना और राजस्थान के कुछ हिस्सों में सूखे की स्थिति पर चिंता है। केंद्र सरकार प्रभावित राज्यों का दौरा करेगी और सहायता प्रदान करेगी।

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