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घोषणा: पेट्रोल निर्यात पर विंडफॉल कर बढ़ा, डीजल पर सरकार ने दी राहत, जानिए क्या एलान हुआ

Fri, 16 Oct 2026 10:26 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सरकार ने 16 अक्तूबर से पेट्रोल निर्यात पर विंडफॉल कर बढ़ाया और डीजल निर्यात पर घटाया। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच घरेलू ईंधन उपलब्धता सुनिश्चित करने का लक्ष्य।
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विंडफॉल टैक्स - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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सरकार ने 16 अक्तूबर से शुरू होने वाले पखवाड़े के लिए निर्यात होने वाले पेट्रोल पर विंडफॉल कर बढ़ा दिया है। वहीं, डीजल के निर्यात पर लगने वाले कर में कटौती की गई है। एटीएफ के निर्यात पर लगने वाला शुल्क 10.5 रुपये प्रति लीटर पर बरकरार रखा गया है। वित्त मंत्रालय ने एक अधिसूचना के माध्यम से इन दरों में बदलाव की जानकारी दी है।

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डीजल निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) को रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर सेस के साथ घटाया गया है। यह अब 16 रुपये प्रति लीटर से कम होकर 8.5 रुपये प्रति लीटर हो गया है। दूसरी ओर, पेट्रोल निर्यात पर शुल्क 0.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। ये नई दरें शुक्रवार, 16 अक्तूबर से प्रभावी हो गई हैं। घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल की मौजूदा शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

विंडफॉल कर क्यों लगाया गया था?

सरकार ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच मार्च 27 को डीजल और एटीएफ के निर्यात पर शुल्क लगाया था। इसका मुख्य उद्देश्य ईंधन की घरेलू उपलब्धता को बढ़ाना था। मई 16 से पेट्रोल निर्यात पर भी यह कर लागू किया गया था। सरकार हर पखवाड़े इन दरों की समीक्षा करती है और उनमें बदलाव करती है।

इस कर का क्या उद्देश्य है?

विंडफॉल कर का एक अन्य उद्देश्य निर्यातकों को अनुचित लाभ लेने से रोकना था। पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई थीं। इस मूल्य अंतर का लाभ उठाकर निर्यातक अधिक मुनाफा कमा रहे थे। सरकार चाहती थी कि पेट्रोलियम उत्पादों की घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित हो।

क्या घरेलू बाजार पर असर पड़ेगा?

वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि घरेलू खपत के लिए बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल की मौजूदा शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसका मतलब है कि देश के भीतर उपभोक्ताओं के लिए कीमतों पर सीधा असर नहीं पड़ेगा। यह कदम मुख्य रूप से निर्यात को हतोत्साहित करने और देश में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने के लिए है।

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