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आईडीबीआई डील: कौन हैं कनाडा के 'वॉरेन बफेट' प्रेम वत्स? जो लगा रहे भारतीय बैंक पर इतना बड़ा दांव, जानिए सबकुछ

Thu, 15 Oct 2026 07:58 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

फेयरफैक्स फाइनेंशियल के प्रमुख प्रेम वत्स भारत के आईडीबीआई बैंक में 60.72% हिस्सेदारी हासिल करने के लिए 52,878 करोड़ रुपये का निवेश कर रहे हैं। जानिए कैसे यह डील भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की दिशा बदलेगी। पूरी रिपोर्ट पढ़कर सबकुछ समझें।
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विस्तार
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भारतीय वित्तीय क्षेत्र में अब तक के सबसे बड़े क्रॉस-बॉर्डर बैंकिंग सौदे के तहत कनाडाई निवेशक प्रेम वात्स की कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल आईडीबीआई बैंक में 60.72 प्रतिशत की नियंत्रक हिस्सेदारी हासिल करने जा रही है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की ओर से स्वीकृत इस 52,878 करोड़ रुपये (लगभग 5.56 अरब डॉलर) के सौदे के जरिए प्रेम वात्स भारत में एक विशाल वित्तीय सेवा पावरहाउस खड़ा करने की योजना बना रहे हैं। अपनी वैल्यू इन्वेस्टिंग रणनीति के लिए कनाडा के वॉरेन बफेट कहे जाने वाले वात्सा का यह दांव भारतीय बैंकिंग परिसंपत्तियों में विदेशी निवेशकों के बढ़ते भरोसे को रेखांकित करता है।

कौन हैं प्रेम वत्स?

प्रेम वत्स टोरंटो स्थित प्रमुख वित्तीय सेवा कंपनी फेयरफॉक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स के संस्थापक, अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। उनका जन्म 5 अगस्त 1950 को भारत के हैदराबाद में हुआ था। उन्होंने आईआईटी मद्रास से केमिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली।

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इसके बाद वत्स कनाडा गए और यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ओंटारियो से एमबीए किया। उन्होंने साल 1985 में फेयरफॉक्स की स्थापना की थी। अपने बेहतरीन मूल्य-निवेश दृष्टिकोण और दीर्घकालिक रणनीतियों के कारण उन्हें 'कनाडा का वॉरेन बफे' कहा जाता है। वत्स लगभग 100 अरब डॉलर की संपत्ति का प्रबंधन करते हैं। फोर्ब्स के अनुसार, उनकी नेटवर्थ करीब 2.7 अरब डॉलर है।

भारत में वत्स का क्या निवेश? उन्हें क्या सम्मान मिला?

प्रेम वत्स ने भारत में भी सीएसबी बैंक, बेंगलुरु एयरपोर्ट और हाल ही में आईडीबीआई बैंक में बड़ी हिस्सेदारी खरीदकर भारी निवेश किया है। उनके व्यापारिक और सामाजिक योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें साल 2020 में पद्म श्री से नवाजा। यह देश का चौथा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है।

आईडीबीआई बैंक सौदे का पूरा गणित क्या?

इस सौदे के तहत केंद्र सरकार अपनी 30.48 प्रतिशत और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) अपनी 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी।

  • प्रति शेयर कितने रुपये की बोली: फेयरफैक्स ने 81 रुपये प्रति शेयर की बोली लगाई है, जो सरकार द्वारा आकलित 75.99 रुपये के निष्पक्ष मूल्य से अधिक है।
  • बैलेंस शीट में सुधार: बैंक का गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) अनुपात 2018 के 32 प्रतिशत से घटकर 2026 में 2.3 प्रतिशत पर आ गया है। 
  • विशाल नेटवर्क: बैंक के पास 4.44 लाख करोड़ रुपये की परिसंपत्तियां और 2,000 से अधिक शाखाओं का राष्ट्रीय नेटवर्क मौजूद है।
  • सरकारी हिस्सेदारी: बिक्री के बाद सरकार और एलआईसी के पास संयुक्त रूप से 34 प्रतिशत हिस्सेदारी बरकरार रहेगी।

एक बैंक के सहारे कैसा पावरहाउस बनाना चाहते हैं प्रेम वत्स?

फेयरफैक्स का लक्ष्य केवल एक बैंक के मार्जिन में सुधार करना नहीं है, बल्कि एकीकृत वित्तीय सेवाएं देना है।

  • संबंधित परिसंपत्तियों का हस्तांतरण: विनियामक मंजूरी के अधीन, फेयरफैक्स अपनी कंपनियों- गो डिजिट लाइफ इंश्योरेंस, गो डिजिट जनरल इंश्योरेंस और आईआईएफएल कैपिटल सर्विसेज की हिस्सेदारी आईडीबीआई बैंक को सौंपने की योजना बना रहा है।
  • एकीकृत मॉडल: इस कदम से बैंकिंग जमा, बीमा उत्पाद, वेल्थ मैनेजमेंट और कैपिटल मार्केट्स की सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म के तहत आ जाएंगी।
  • मौजूदा पोर्टफोलियो: फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स के पास जून 2026 तक 3.8 अरब डॉलर की सूचीबद्ध परिसंपत्तियां थीं, जिन्हें अब आईडीबीआई बैंक के रूप में एक मजबूत बैंकिंग एंकर मिल जाएगा।

अन्य विदेशी दिग्गजों के मुकाबले फेयरफैक्स की रणनीति अलग क्यों है?

अन्य वैश्विक निवेशक भी भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में अवसर देख रहे हैं, लेकिन उनकी रणनीति अल्पसंख्यक हिस्सेदारी तक सीमित रही है।

  • जापानी और खाड़ी निवेशकों के सौदे: सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉर्पोरेशन ने यस बैंक में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी (13,483 करोड़ रुपये) ली, जबकि एमयूएफजी ने श्रीराम फाइनेंस में 4.45 अरब डॉलर का निवेश किया। वहीं एमिरेट्स एनबीडी ने आरबीएल बैंक में 3 अरब डॉलर का निवेश किया।
  • नियंत्रक मॉडल: इन निवेशकों के विपरीत, फेयरफैक्स सीधे नियंत्रण हासिल कर बैंकिंग, बीमा और पूंजी बाजार के व्यवसाय चलाता है।

इस मेगा डील में क्या चुनौतियां और जोखिम भी शामिल हैं?

इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए कई नियामक और परिचालन बाधाओं को पार करना होगा।

  • दोहरे मालिकाना हक की जटिलता: फेयरफैक्स के पास केरल स्थित सीएसबी बैंक में लगभग 40 प्रतिशत हिस्सेदारी है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नियमों के तहत इस ओवरलैपिंग को सुलझाना होगा, जिसके लिए सीएसबी बैंक और आईडीबीआई बैंक के विलय की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है।
  • विनियामक मंजूरियां: बीमा और कैपिटल मार्केट्स परिसंपत्तियों के हस्तांतरण के लिए कई नियामकों से अलग-अलग मंजूरियां प्राप्त करनी होंगी।

भारत के वित्तीय क्षेत्र के लिए आगे का रास्ता क्या है?

आईडीबीआई बैंक का यह रणनीतिक अधिग्रहण भारत के बैंकिंग क्षेत्र में विदेशी पूंजी के प्रवेश का एक नया अध्याय है। यदि फेयरफैक्स अपनी क्रेडिट गुणवत्ता को प्रभावित किए बिना इन विविध व्यवसायों का एकीकरण करने में सफल रहता है, तो यह भारतीय वित्तीय बाजार में एक नया मानदंड स्थापित करेगा। हालांकि, कड़े विनियामक नियमों के बीच परिसंपत्तियों के कुशल प्रबंधन पर ही इस मेगा डील की वास्तविक सफलता निर्भर करेगी।

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