वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सोमवार को लोकसभा में बताया कि सरकार वित्तीय समावेशन को मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि बुनियादी बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच से औपचारिक वित्तीय प्रणाली में सार्थक भागीदारी हो, जिसमें ऋण तक पहुंच भी शामिल है।
वित्त राज्य मंत्री ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि अब तक पीएमजेडीवाई के तहत 55.90 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं। देश भर के बैंक वित्तीय समावेशन (एफआई) योजनाओं को गहन बनाने व लाभार्थियों के बैंक खातों में पुनः केवाईसी करने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान चल रहा है। तीन महीने का यह अभियान 1 जुलाई से शुरू होकर 30 सितम्बर 2025 को समाप्त होगा।
सरकार की ओर से सदन में बताया गया बैंक ग्राम पंचायत (जीपी) स्तर पर शिविरों का आयोजन कर रहे हैं। इन शिविरों के जरिए मौजूदा प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) खातों और अन्य बैंक खातों के केवाईसी के पुनः सत्यापन, बैंकिंग सुविधा से वंचित वयस्कों के लिए पीएमजेडीवाई खाते खोलने और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, अर्थात् प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) और अटल पेंशन योजना (एपीवाई) के अंतर्गत नामांकन जैसी सेवाएं लोगों को घर-घर पहुंचाने की कवायद हो रही है।
सरकार ने बताया है कि ग्राहकों को अपने केवाईसी स्टेटस को अपडेट करने में सुविधा प्रदान करने के लिए ग्राम पंचायतों में बैकों के शिविर लग रहे हैं। बीसी भी शिविरों में भाग ले रहे हैं। राष्ट्रव्यापी अभियान के पहले महीने के दौरान, अब तक कई ग्राम पंचायतों में 1.05 लाख शिविर आयोजित किए गए हैं। यह देश में कुल ग्राम पंचायतों का एक तिहाई हिस्सा है, जिसमें 6 लाख से अधिक पीएमजेडीवाई खाते खोले गए। इसके साथ ही, पीएमजेजेबीवाई के तहत 7 लाख से अधिक नामांकन, पीएमएसबीवाई के तहत लगभग 12 लाख नामांकन और एपीवाई के तहत 3 लाख नामांकन प्राप्त हुए।
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शिविर के माध्यम से 14.22 लाख बैंक खातों में फिर से केवाईसी की गई है। सरकार ने ग्राहकों से अपील की है कि वे इन शिविरों का लाभ उठाएं। एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए चौधरी ने कहा कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) और अन्य प्रशासनिक सुधारों के अमल में आने से नकली और फर्जी लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें हटाया गया है और लीकेज को रोका गया है। उन्होंने कहा इससे सरकार वास्तविक व पात्र लाभार्थियों की बेहतर ढंग से मदद करने में सक्षम हुई है। चौधरी ने कहा कि इन उपायों से वित्त वर्ष 2023-24 तक कुल बचत (लाभ) 4,31,138.05 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।