फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jan-Dhan: बैंकों ने 55.9 करोड़ जन धन खाते खोले, मंत्री बोले- हम वित्तीय समावेशन बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध

Mon, 04 Aug 2025 05:35 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Jan-Dhan: वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि अब तक पीएमजेडीवाई के तहत 55.90 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं। संतृप्ति अभियान के एक भाग के रूप में, देश भर के बैंक वित्तीय समावेशन (एफआई) योजनाओं को गहन बनाने व लाभार्थियों के बैंक खातों में पुनः केवाईसी करने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान में लगे हुए हैं। तीन महीने का यह अभियान 1 जुलाई से शुरू होकर 30 सितम्बर 2025 को समाप्त होगा।
विज्ञापन
प्रधानमंत्री जनधन योजना। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सोमवार को लोकसभा में बताया कि सरकार वित्तीय समावेशन को मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि बुनियादी बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच से औपचारिक वित्तीय प्रणाली में सार्थक भागीदारी हो, जिसमें ऋण तक पहुंच भी शामिल है।

विज्ञापन


ये भी पढ़ें: RBI MPC: आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक शुरू, 6 अगस्त को गवर्नर संजय मल्होत्रा करेंगे फैसलों का एलान

वित्त राज्य मंत्री ने कहा है कि अगस्त 2014 में प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) का शुभारंभ बैंकिंग सुविधा से वंचित लोगों को बैंकिंग सुविधा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। चौधरी ने कहा कि इससे बुनियादी बचत बैंक जमा खाते खोलने की सुविधा मिली है, साथ ही रुपे डेबिट कार्ड और ओवरड्राफ्ट जैसी अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध हुई हैं।

पीएमजेडीवाई के तहत 55.90 करोड़ से अधिक खाते खोले गए

वित्त राज्य मंत्री ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि अब तक पीएमजेडीवाई के तहत 55.90 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं। देश भर के बैंक वित्तीय समावेशन (एफआई) योजनाओं को गहन बनाने व लाभार्थियों के बैंक खातों में पुनः केवाईसी करने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान चल रहा है। तीन महीने का यह अभियान 1 जुलाई से शुरू होकर 30 सितम्बर 2025 को समाप्त होगा।

केवाईसी के पुन: सत्यापन के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर शिविरों का हो रहा आयोजन

सरकार की ओर से सदन में बताया गया बैंक ग्राम पंचायत (जीपी) स्तर पर शिविरों का आयोजन कर रहे हैं। इन शिविरों के जरिए मौजूदा प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) खातों और अन्य बैंक खातों के केवाईसी के पुनः सत्यापन, बैंकिंग सुविधा से वंचित वयस्कों के लिए पीएमजेडीवाई खाते खोलने और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, अर्थात् प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) और अटल पेंशन योजना (एपीवाई) के अंतर्गत नामांकन जैसी सेवाएं लोगों को घर-घर पहुंचाने की कवायद हो रही है।

विज्ञापन

 
ये भी पढ़ें: Tariffs Row: ट्रेड यूनियन और किसान अमेरिकी टैरिफ व भारत-ब्रिटेन सीईटीए का करेंगे विरोध, प्रदर्शन 13 अगस्त को
विज्ञापन


इन शिविरों का उपयोग दावा न की गई जमा राशि के बारे में जागरूकता पैदा करने और शिकायतों के निवारण के लिए भी किया जा रहा है। स्थानीय प्रशासनिक तंत्र भी इस पहल को आगे बढ़ाने में मदद कर रहा है। वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) और भारतीय रिजर्व बैंक इन अभियानों की प्रगति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। बैंकों को पुनः-केवाईसी प्रक्रिया में बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट की सेवाओं का उपयोग करने की अनुमति दी गई है।

शिविर लगाकर केवाईसी अपडेट किया जा रहा

सरकार ने बताया है कि ग्राहकों को अपने केवाईसी स्टेटस को अपडेट करने में सुविधा प्रदान करने के लिए ग्राम पंचायतों में बैकों के शिविर लग रहे हैं। बीसी भी शिविरों में भाग ले रहे हैं। राष्ट्रव्यापी अभियान के पहले महीने के दौरान, अब तक कई ग्राम पंचायतों में 1.05 लाख शिविर आयोजित किए गए हैं। यह देश में कुल ग्राम पंचायतों का एक तिहाई हिस्सा है, जिसमें 6 लाख से अधिक पीएमजेडीवाई खाते खोले गए। इसके साथ ही, पीएमजेजेबीवाई के तहत 7 लाख से अधिक नामांकन, पीएमएसबीवाई के तहत लगभग 12 लाख नामांकन और एपीवाई के तहत 3 लाख नामांकन प्राप्त हुए।

ये भी पढ़ें: GST Evasion: 5 वर्षों में ₹7.08 लाख करोड़ की जीएसटी चोरी पकड़ी गई, वित्त राज्य मंत्री ने लोकसभा में दिए आंकड़े

शिविर के माध्यम से 14.22 लाख बैंक खातों में फिर से केवाईसी की गई है। सरकार ने ग्राहकों से अपील की है कि वे इन शिविरों का लाभ उठाएं। एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए चौधरी ने कहा कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) और अन्य प्रशासनिक सुधारों के अमल में आने से नकली और फर्जी लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें हटाया गया है और लीकेज को रोका गया है। उन्होंने कहा इससे सरकार वास्तविक व पात्र लाभार्थियों की बेहतर ढंग से मदद करने में सक्षम हुई है। चौधरी ने कहा कि इन उपायों से वित्त वर्ष 2023-24 तक कुल बचत (लाभ) 4,31,138.05 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें