सरकार कालेधन के खिलाफ अपने अभियान को और मजबूती देने जा रही है। अब आयकर विभाग ने अपने अधिकारियों की ओर से दूसरे प्राधिकरणों और एजेंसियों के साथ जानकारी साझा करना शुरू करने जा रही है। टैक्स से जुड़ी जानकारियां साझा करने के लिए राजस्व विभाग ने आयकर की धारा 138डी में हल्का परिवर्तन किया है।
ये 23 मई, 2003 से आयकरदाताओं की जानकारी दूसरे प्राधिकरणों से साझा करने के मैकेनिज्म से संबंधित है।
धारा 138 में हल्के फेरबदल से आयकर संबंधी जानकारियां दूसरी एजेंसियों से साझा करने में आने वाली अड़चनें बिल्कुल खत्म हो जाएंगी। वर्ष, 2003 की अधिसूचना के मुताबिक कुछ अपवादों को छोड़कर टैक्स से जुड़ी कोई भी जानकारी किसी व्यक्ति या प्राधिकरण से साझा करने पर पाबंदी थी।
लोन डिपोजिट से कालाधन ठिकाने लगाने वालों पर होगी कार्रवाई
सरकार नोटबंदी के बाद कालाधन ठिकाने लगाने वालों के खिलाफ कड़ा अभियान शुरू करने जा रही है। इसके तहत अब कुछ मामलों में लोन डिपोजिट के जरिये कालेधन को सफेद करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है। सरकार ऑपरेशन क्लीन के तहत 20,000 रुपये या इससे ज्यादा की रकम लोन डिपोजिट के तहत जमा करने पर समान राशि का जुर्माना लगा सकती है।
सीबीडीटी की ओर से मंगलवार को जारी निर्देशों के मुताबिक कर निर्धारित करने वाले अफसरों को 18 लाख लोगों की जांच करनी होगी। इन लोगों को इस कवायद के तहत मैसेज भेजा गया है। अगर स्वीकार्य सीमा से ऊपर लोन या इसकी अदायगी के तौर पर रकम खाते में जमा कराई गई है तो संबंधित प्रावधानों के मुताबिक कार्रवाई हो सकती है।
इस संबंध में आयकर की धारा 269एसएस 269टी का हवाला दिया गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक 8 नवंबर के बाद इस तरह के लेनदेन को तभी लोन ट्रांजेक्शन माना जाएगा, जब आयकर दाता से पूछताछ में इसकी पुष्टि हो जाएगी।
बेनामी संपत्ति : आयकर विभाग ने दर्ज किए 230 मामले
नए बेनामी ट्रांजेक्शन कानून के तहत आयकर विभाग ने नोटबंदी के बाद से लेकर अब तक 230 से ज्यादा मामले दर्ज किए हैं। इसके साथ ही 55 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है।
पिछले साल 1 नवंबर से लागू इस कानून का उल्लंघन किए जाने पर भारी जुर्माने और सात साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है।
आयकर विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कानून के तहत मध्य फरवरी तक 235 मामले दर्ज किए गए हैं। 140 मामलों में कारण बताओ नोटिस जारी किया गयैह ।