फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जेट संकट का हल निकालने के लिए सरकार के पास हैं तीन विकल्प

Wed, 20 Mar 2019 12:30 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
विज्ञापन

जेट एयरवेज का संकट गहराता जा रहा है। लोकसभा चुनाव के मौसम में केंद्र सरकार इस एयरलाइन का हाल किंगफिशर जैसा नहीं चाहती है। इसलिए मंगलवार से ही सरकार ने इस एयरलाइन को चलाने के लिए सभी तरह के विकल्पों पर विचार करना शुरू कर दिया है। 

23 हजार कर्मचारियों की हो सकती है छुट्टी

सरकार का मानना है कि जेट एयरवेज को अगर वित्तीय संकट से नहीं उबारा गया और यह बंद होती है तो फिर 23 हजार कर्मचारियों को नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा। ऐसे में सरकार की इमेज पर असर तो पड़ेगा ही साथ ही साथ विपक्षी पार्टियों को भी मुद्दा मिल जाएगा। 

यह है पहला विकल्प

सरकार ने विमानन कंपनी को कर्ज देने वाले बैंकों से दिवालिया प्रक्रिया बंद कर उसे बचाने की प्रक्रिया शुरू करने की मंशा जताई है।  वित्त मंत्रालय इस स्थिति पर करीब से नजर बनाए हुए है। पिछले सप्ताह बैंकों ने जेट एयरवेज की वित्तीय स्थिति पर समीक्षा रिपोर्ट पेश कर सरकार से सुझाव मांगा था। सरकार ने जवाब में कहा है कि बैंक कर्ज की राशि को इक्विटी में बदलकर जेट एयरवेज में हिस्सेदारी ले सकते हैं। 

विज्ञापन


हालांकि, ऐसा बहुत ही कम होता है लेकिन करदाताओं के पैसे से मुसीबत में फंसी विमानन कंपनी को दिवालिया प्रक्रिया से बचाना चाहिए। कंपनी की स्थिति में सुधार आने के बाद बैंक चाहें तो अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं। जेट एयवेज पर 8 हजार करोड़ से अधिक का कर्जा है और वह मार्च में ब्याज व किस्त भी नहीं चुका सकी है।

विज्ञापन

बैंक नहीं जाएंगे दिवालिया कोर्ट

सरकार द्वारा आदेश मिलने के बाद अब बैंक भी कंपनी के खिलाफ दिवालिया कोर्ट में नहीं जाएगी। ऐसा इसलिए क्योंकि कंपनी की फिलहाल जो मार्केट कैप है वो दिवालिया कोर्ट में जाने से और कम हो जाएगी। अंतर-क्रेडिटर अनुबंध के चलते दिवालिया प्रक्रिया के अलावा और भी रास्ते कंपनी को संकट से निकालने के लिए होते हैं। 

1900 करोड़ का करेगी NIIF निवेश

राष्ट्रीय निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (एनआईआईफ) ने जेट एयरवेज में 1900 करोड़ रुपये का निवेश करने पर अपनी सहमति जताई है। जेट के पास इतनी अचल संपत्ति भी नहीं है कि उसको दिवालिया प्रक्रिया के तहत ले जाया जाए।

फिलहाल कंपनी के केवल 41 विमान ही उड़ रहे हैं। इस संकट से पहले हर हफ्ते जेट एयरवेज की कुल 1065 उड़ानें होती थीं। इनमें से  683 उड़ानें घरेलू रूट पर और 382 उड़ाने अंतरराष्ट्रीय रूट पर उड़ रहे थे। हालांकि अब विमानों की संख्या कम होने से जेट एयरवेज ने कई सारी उड़ानें रद्द कर दी हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें