जेट एयरवेज का संकट गहराता जा रहा है। लोकसभा चुनाव के मौसम में केंद्र सरकार इस एयरलाइन का हाल किंगफिशर जैसा नहीं चाहती है। इसलिए मंगलवार से ही सरकार ने इस एयरलाइन को चलाने के लिए सभी तरह के विकल्पों पर विचार करना शुरू कर दिया है।
23 हजार कर्मचारियों की हो सकती है छुट्टी
सरकार का मानना है कि जेट एयरवेज को अगर वित्तीय संकट से नहीं उबारा गया और यह बंद होती है तो फिर 23 हजार कर्मचारियों को नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा। ऐसे में सरकार की इमेज पर असर तो पड़ेगा ही साथ ही साथ विपक्षी पार्टियों को भी मुद्दा मिल जाएगा।
यह है पहला विकल्प
सरकार ने विमानन कंपनी को कर्ज देने वाले बैंकों से दिवालिया प्रक्रिया बंद कर उसे बचाने की प्रक्रिया शुरू करने की मंशा जताई है। वित्त मंत्रालय इस स्थिति पर करीब से नजर बनाए हुए है। पिछले सप्ताह बैंकों ने जेट एयरवेज की वित्तीय स्थिति पर समीक्षा रिपोर्ट पेश कर सरकार से सुझाव मांगा था। सरकार ने जवाब में कहा है कि बैंक कर्ज की राशि को इक्विटी में बदलकर जेट एयरवेज में हिस्सेदारी ले सकते हैं।
हालांकि, ऐसा बहुत ही कम होता है लेकिन करदाताओं के पैसे से मुसीबत में फंसी विमानन कंपनी को दिवालिया प्रक्रिया से बचाना चाहिए। कंपनी की स्थिति में सुधार आने के बाद बैंक चाहें तो अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं। जेट एयवेज पर 8 हजार करोड़ से अधिक का कर्जा है और वह मार्च में ब्याज व किस्त भी नहीं चुका सकी है।