सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को हुए नुकसान के लिए 30 से 35 हजार की सब्सिडी दे सकती है। इंडियन ऑलय कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल) को पिछले 15 महीनों में लागत से कम कीमत पर एलपीजी बेचने के लिए यह भरपाई की जाएगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वित्त मंत्रालय वास्तविक घाटे और उसकी भरपाई के लिए तंत्र पर काम कर रहा है।
1 फरवरी को पेश किए गए वित्त वर्ष 2026 (अप्रैल 2025 से मार्च 2026) के केंद्रीय बजट में, सरकार ने ऐसे घाटे की भरपाई के लिए कोई प्रावधान नहीं किया है। हालाँकि, अप्रैल में, सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क बढ़ाकर 32,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व जुटाया। इस अतिरिक्त राजस्व का उपयोग वित्त मंत्रालय एलपीजी की नुकसान की भरपाई के लिए कर सकता है।
अधिकारी ने कहा कि तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) सरकारी ढांचे का हिस्सा हैं। मुआवजा दिया जाएगा। हम मूल्यांकन कर रहे हैं कि कितनी वसूली बाकी है और उन्हें मुआवजा देने के तौर-तरीकों पर विचार कर रहे हैं।
घरेलू रसोई गैस की कीमतों को सरकार नियंत्रित करती है ताकि नागरिकों को ऊंची बाजार दरों से बचाया जा सके। नियंत्रित कीमतें सऊदी अरब के सीपी से कम हैं । यह घरेलू रसोई गैस की कीमत तय करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय मानक है। ऐसा इसलिए है क्योंकि घरेलू रसोई गैस का उत्पादन स्थानीय माँग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है और ईंधन का आयात करना पड़ता है। इससे ईंधन के खुदरा विक्रेताओं को नुकसान होता है।
वित्त वर्ष 2024-25 में उद्योग के लिए एलपीजी बिक्री पर कुल अंडर-रिकवरी लगभग 40,500 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। उत्पाद शुल्क वृद्धि के साथ-साथ, खुदरा रसोई गैस (एलपीजी) की 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत में 50 रुपये की बढ़ोतरी की गई। इससे लागत और खुदरा बिक्री मूल्य के बीच के अंतर को कम करने में मदद मिली, जिससे चालू वित्त वर्ष में घाटे में कमी आई। इससे पहले, सरकार दो वित्तीय वर्षों में कुल 35,000 करोड़ रुपये की एलपीजी सब्सिडी उपलब्ध कराने पर विचार कर रही थी।
अधिकारी ने आगे कहा कि वे इस बात का मूल्यांकन कर रहे हैं कि हाल ही में उत्पाद शुल्क में की गई वृद्धि से प्राप्त राशि को मुआवजे की राशि में कैसे शामिल किया जाए। उन्होंने बताया कि तेल विपणन कंपनियों को मुआवजा भारत के समेकित कोष के माध्यम से दिया जाएगा। एक बार प्रस्ताव तैयार हो जाने पर इसे मंजूरी के लिए कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। अधिकारी ने कहा कि एक बार जब तेल विपणन कंपनियों को धनराशि जारी कर दी जाएगी। इसके बाद यह उनका विशेषाधिकार होगा कि वे पूंजीगत व्यय सहित धनराशि का किस प्रकार उपयोग करना चाहती हैं।