वित्त मंत्रालय ने राज्यों के वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) मुआवजे में कमी की भरपाई के लिए 14वीं किस्त के रूप में 6,000 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए हैं। वित्त मंत्रालय ने बुधवार को यह जानकारी दी। 6,000 करोड़ रुपये में से 5,516.60 करोड़ रुपये 23 राज्यों को मिले हैं, वहीं 483.40 करोड़ रुपये दिल्ली, जम्मू एंड कश्मीर और पुदुचेरी को हस्तांतरित किए गए हैं।
अक्तूबर 2020 में केंद्र ने जीएसटी क्षतिपूर्ति को लेकर विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों की मांग को स्वीकार कर लिया था। उनकी मांग थी कि केंद्र स्वयं कर्ज लेकर राज्यों की जीएसटी की क्षतिपूर्ति करे।
वित्त मंत्रालय ने कहा कि केंद्र, राज्यों को जीएसटी संग्रह में 1.1 लाख करोड़ रुपये की कमी की क्षतिपूर्ति के लिए बाजार से किस्तों में कर्ज उठाएगा।
अगस्त में राज्यों को दिए थे दो विकल्प
मंत्रालय ने कहा था कि वह हर सप्ताह राज्यों को 6,000 करोड़ रुपये जारी करेगा। वित्त मंत्रालय ने कहा कि इस व्यवस्था से केंद्र के राजकोषीय घाटे पर असर नहीं होगा और यह राज्य सरकारों की पूंजी प्राप्ति के रूप में प्रदर्शित होगा। केंद्र ने जीएसटी क्षतिपूर्ति को लेकर अगस्त 2020 में राज्यों को दो विकल्प दिए थे। पहला वह जीएसटी क्रियान्वयन के कारण राजस्व संग्रह में कमी को पूरा करने के लिये 97,000 करोड़ रुपये रिजर्व बैंक की विशेष खिड़की से ले या फिर कुल 2.35 लाख करोड़ रुपये (इसमें 1.38 लाख करोड़ रुपये कोविड संकट के कारण) बाजार से ऋण ले ले। इस राशि को संशोधित कर अब क्रमश: 1.10 लाख करोड़ रुपये और 1.8 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है।
जीएसटी संग्रह जनवरी में रिकॉर्ड 1.21 से 1.23 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। इससे राज्य जीएसटी संग्रह में कमी न्यूनतम 11,000 करोड़ रुपये रह जाएगी। एक रिपोर्ट में यह कहा गया है। जीएसटी संग्रह में खामियों को दूर करने के लिए किए गए प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है।