जब केंद्र में मोदी सरकार बनी, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में गिरावट का रुख था। लेकिन सरकार ने पेट्रोल एवं डीजल की कीमत घटाने के बजाय 15 महीने में दोनों पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में नौ बार बढ़ोतरी कर दी।
इस तरह से डीजल पर प्रति लीटर 13.57 रुपये, जबकि पेट्रोल पर 11.77 रुपये का बोझ बढ़ गया। हालांकि, जब कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम एक बार फिर से बढ़ने लगे, तो अक्तूबर 2017 में दोनों ईंधनों पर प्रति लीटर दो रुपये का उत्पाद शुल्क ही घटाया गया है।
राज्य करे पहल
केंद्र सरकार का कहना है कि पेट्रोल और डीजल पर सिर्फ केंद्र ही नहीं, बल्कि राज्य सरकारें भी काफी वैट वसूलती हैं। फिलहाल वह कर कम करे। इस दिशा में केरल ने बेहतर कदम उठाया है और अन्य राज्य भी ऐसा करे। पीपीएसी के मुताबिक, राज्यों में इस समय पेट्रोल पर अधिकतम 39.78 फीसदी (महाराष्ट्र में) और डीजल पर अधिकतम 28.47 फीसदी (आंध्र प्रदेश में) वैट वसूला जा रहा है। दिल्ली में पेट्रोल पर 27 फीसदी जबकि डीजल पर 17.27 फीसदी वैट है।
कुछ दिनों में खुद घटेगी कीमतें
केंद्रीय वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के विभाग में सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में नरमी आनी शुरू हो गई। अगले कुछ दिनों में यहां भी पेट्रोल-डीजल की कीमतें अपने आप नरम हो जाएंगी।