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GST में हो सकते हैं केवल 10 और 20 फीसदी के दो स्लैब, समिति ने की सिफारिश

Wed, 25 Dec 2019 10:19 AM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला

सार

  • केंद्र और राज्यों के अधिकारियों की समिति ने की सिफारिश।
  • घट सकती है जीएसटी स्लैब की संख्या। 
  • जीएसटी से छूट वाली सूची से बाहर हो सकते हैं कई सामान।
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विस्तार
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चालू वित्त वर्ष के दौरान जीएसटी मुआवजा उपकर में 60 हजार करोड़ रुपये की कमी रहने के अनुमान के मद्देनजर एक अधिकारियों की समिति ने छूट वाले उत्पादों की सूची में कटौती और कुछ उत्पादों पर कर में बढ़ोतरी सहित राजस्व बढ़ाने के कई उपाय सुझाए हैं। इसके साथ ही जीएसटी स्लैब की संख्या घटाकर दो करने का भी सुझाव दिया गया है। समिति ने कहा है कि 10 फीसदी और 20 फीसदी के स्लैब बनाए जा सकते हैं। या फिर 18 फीसदी के स्लैब में शामिल कुछ वस्तुओं को फिर से 28 फीसदी के स्लैब में डाला जा सकता है।

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समिति ने की सिफारिश

सूत्रों ने कहा कि केंद्र और  राज्यों के अधिकारियों की समिति ने शिक्षा और स्वास्थ्य पर एक सीमा तक कर लगाने की भी सिफारिश की है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की समीक्षा के लिए इस समिति का गठन किया गया था। इस समिति ने 18 दिसंबर को जीएसटी परिषद में प्रस्तुतीकरण दिया था। समिति ने संसाधनों में बढ़ोतरी के लिए छूट वाली सूची में कटौती करने का भी सुझाव दिया। मीट, मछली, अंडे, शहद, दुग्ध उत्पाद, सब्जियां, फल और सूखे मेवे आदि जीएसटी से छूट वाले सामानों की सूची में आते हैं। 

मोबाइल फोन पर बढ़ सकता है जीएसटी

सूत्रों ने कहा कि समिति ने कुछ सामानों को पांच फीसदी से 12 फीसदी और मोबाइल फोन जैसे कुछ सामानों को 12 से 18 फीसदी के स्लैब में डालने का सुझाव दिया है। समिति की राय है कि जीएसटी परिषद को 18 फीसदी स्लैब में आने वाले कुछ सामान को 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी के स्लैब में लाने पर भी विचार करना चाहिए।

ये है सरकार का लक्ष्य

इस वित्त वर्ष के दौरान सरकार के कर संग्रह के लक्ष्य से चूकने की चर्चाओं के बीच वित्त मंत्रालय ने हर महीने 1.10 लाख करोड़ रुपये जीएसटी संग्रह का लक्ष्य तय किया है। यह लक्ष्य वित्त वर्ष 2019-20 के बाकी बचे चार महीनों के लिए है। मंत्रालय के सूत्रों से यह जानकारी मिली। गौरतलब है कि सरकार जीएसटी संग्रह में कमी की समस्या से जूझ रही है। 

18 दिसंबर को हुई थी 38वीं बैठक

18 दिसंबर को जीएसटी परिषद की 38वीं बैठक हुई। बैठक में फैसला लिया गया कि राज्य सरकार द्वारा चलायी जाने वाली लॉटरी या राज्य सरकार द्वारा अधिकृत लॉटरी पर अब 28 फीसदी की दर से वस्तु एवं सेवा कर का भुगतान करना होगा। यह फैसला एक मार्च 2020 से लागू होगा। इसी के साथ पैकिंग में काम आने वाले विभिन्न प्रकार के बैग पर अब 18 फीसदी की दर से जीएसटी देय होगा। 

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