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2018-19 में 71 हजार करोड़ का हुआ बैंकों में फ्रॉड, 74 फीसदी हुई बढ़ोतरीः RBI

Tue, 24 Dec 2019 09:00 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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वित्त वर्ष 2018-19 में बैंकों में 71 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का फ्रॉड हुआ। यह 2017-18 के मुकाबले करीब 74 फीसदी ज्यादा है। उस साल 41,167 करोड़ रुपये का फ्रॉड हुआ था। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया है। 

बैंकों के डूब गए 71,543 करोड़ रुपये

आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार धोखाधड़ी से बैंकों के कुल 71,543 करोड़ डूब गए। यह रकम वोडाफोन आइडिया को दूसरी तिमाही में हुए 50 हजार करोड़ रुपये के नुकसान से भी ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक धोखाधड़ी के जो केस बैंकों ने दर्ज किए हैं उनमें भी इजाफा देखने को मिला। 2017-18 में जहां 5916 केस दर्ज हुए थे, वहीं 2018-19 में यह संख्या 6801 हो गई। जहां सरकारी बैंकों में बड़े फ्रॉड की संख्या में 91.6 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की, वहीं निजी बैंकों ने 30.7 फीसदी और विदेशी बैंकों में 11.2 फीसदी रहा। 

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बैंकों ने 64548 करोड़ रुपये धोखाधड़ी के 3606 केस दर्ज किए। वहीं विदेशी मुद्रा से जुड़े 695 करोड़ रुपये के 13 केस दर्ज किए। इस अवधि में कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग से जुड़े 71 करोड़ रुपये के 1866 धोखाधड़ी केस दर्ज किए गए थे। 

सात साल में पहली बार नीचे आया घटा सकल एनपीए

 फंसे कर्ज को लेकर रिजर्व बैंक के सख्त रुख का असर दिखने लगा है। पिछले एक साल में सरकारी और निजी बैंकों की गैर निष्पादित आस्तियों (एनपीए) में 2 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई है। आरबीआई ने मंगलवार को बैंकिंग क्षेत्र के रुझान और प्रगति रिपोर्ट 2018-19 में बताया कि बैंकों का सकल एनपीए सात वर्षों में पहली बार नीचे आया है, जबकि वास्तविक एनपीए भी कम हुआ है। 
 
दरअसल, फंसे कर्ज की पहचान को लेकर रिजर्व बैंक की प्रक्रिया पूरी होने को है। आरबीआई ने इससे पहले बैंकों की वास्तविक स्थिति का खुलासा किया है। रिजर्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट मेें कहा कि सितंबर 2019 तक बैंकों का सकल एनपीए घटकर 9.1 फीसदी पर आ गया है, जो वित्त वर्ष 2018 की समान अवधि में 11.2 फीसदी थी। इसी तरह, वास्तविक एनपीए में भी कमी आई है और यह 2018 के 6 फीसदी से गिरकर सितंबर में 3.7 फीसदी पर आ गया है। आरबीआई के अनुसार, लगातार सात वर्षों तक इजाफे के बाद सभी बैंकों का सकल एनपीए 2018-19 में पहली बार नीचे आया है।   

सरकारी बैंकों को बड़ी राहत

आरबीआई का कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संपत्तियों की गुणवत्ता में सुधार का असर सकल एनपीए और वास्तविक एनपीए पर दिखा है। इसके अलावा सकल एनपीए के बकाए में गिरावट और स्लीपेज अनुपात में कमी से भी एनपीए नीचे आया है। सरकारी बैंकों का सकल एनपीए 2019 में घटकर 11.6 फीसदी रहा, जो एक साल पहले 14.6 फीसदी था। वास्तविक एनपीए भी 2018 के 8 फीसदी से घटकर 4.8 फीसदी पर आ गया है। वहीं, निजी क्षेत्र के बैंकों का सकल एनपीए 5.3 फीसदी से घटकर 4.7 फीसदी और वास्तविक एनपीए 2.4 फीसदी से 2 फीसदी हो गया है। 

कर्ज माफी से बढ़ा कृषि क्षेत्र का एनपीए

रिजर्व बैंक ने बताया कि वित्त वर्ष 2019 में कृषि क्षेत्र को दिए गए कर्ज में एनपीए बढ़ा है, जो 2020 की पहली छमाही में भी जारी है। इस पर सबसे ज्यादा असर उन राज्यों में हुआ है, जहां 2018 और 2019 में किसानों का कर्ज माफ किया गया। हालांकि, सबसे ज्यादा सकल एनपीए के मामले में 17.4 फीसदी के साथ उद्योग क्षेत्र अब भी शीर्ष पर है। इस क्षेत्र में कुल एनपीए राशि का दो तिहाई शामिल है।  

आरबीआई को विलय से मजबूती आने का भरोसा

रिजर्व बैंक ने भरोसा जताया है कि सरकारी बैंकों की विलय प्रक्रिया पूरी होने से भारतीय बैंकिंग क्षेत्र वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकेगा। अभी टॉप-50 बैंकों की वैश्विक सूची में एक भी भारतीय बैंक शामिल नहीं है। आरबीआई ने कहा, स्टेट बैंक के सहयोगी बैंकों के विलय के बाद यह 450 अरब डॉलर की पूंजी के साथ वैश्विक सूची में शामिल होने के करीब पहुंच गया था। हालांकि, फंसे कर्ज के दबाव में बैलेंस शीट बिगड़ गई। गौरतलब है कि सरकार ने गत अगस्त में सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों के विलय की घोषणा की थी।

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