चीनी के बंपर घरेलू उत्पादन को देखते हुए सरकार ने बुधवार को बफर स्टॉक का दायरा बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (सीसीईए) ने अगले विपणन वर्ष के लिए चीनी का बफर स्टॉक 10 लाख टन बढ़ा दिया है। कमेटी ने गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में कोई बदलाव नहीं किया है।
अगले विपणन वर्ष के लिए चीनी का बफर स्टॉक बढ़ाए जाने से सरकारी खजाने पर 1,674 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा। अगस्त 2018 में केंद्र सरकार ने 30 लाख टन का चीनी बफर स्टॉक बनाया था, जिस पर कुल 1,175 करोड़ रुपये का खर्च सरकारी खजाने पर आया था। इस बढ़ोतरी का मकसद चीनी मिलों में नकदी तरलता बढ़ाना और किसानों के बकाए का भुगतान कराना है। इस कदम से घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें स्थिर रखने में भी मदद मिलेगी।
देश में अभी 2.60 करोड़ टन की वार्षिक घरेलू खपत है, जबकि चालू 2018-19 बाजार वर्ष (अक्तूबर-सितंबर) में भारत का कुल चीनी उत्पादन तीन करोड़ 20 लाख 95 हजार टन रहने का अनुमान है। उद्योग निकाय एस्मा के अनुसार, चीनी का शुरुआती स्टॉक 1 अक्तूबर 2019 को लगभग 1.45 करोड़ टन के उच्च स्तर पर रहने की उम्मीद है, जबकि वर्तमान खपत के मुताबिक देश में इसकी जरूरत 50 लाख टन की ही है।
चीनी उद्योग के हालात में तेजी से सुधार आ रहा है। मिलों पर गन्ना किसानों का बकाया काफी कम हो गया है। 2018-19 के सीजन में चीनी मिलों पर कुल बकाया करीब 85 हजार करोड़ रुपये था। केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने पिछले दिनों संसद में बताया था कि अब किसानों का बकाया घटकर 15,222 करोड़ रुपये रह गया है। चालू सीजन में यूपी की चीनी मिलों पर किसानों का सबसे ज्यादा 9,746 करोड़ रुपये बकाया है।