सरकार ने 15वें वित्त आयोग का कार्यकाल बढ़ाने का फैसला किया है। साथ ही वित्त आयोग को अपनी पहली रिपोर्ट पहले वित्त वर्ष -2020-21- के लिए सौंपने को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को यहां हुई बैठक में इस आशय का फैसला किया गया। कर वसूली और कुछ दूसरे संसाधनों का बंटवारा केंद्र और राज्यों के बीच किस प्रकार से हो, इस बारे में वित्त आयोग अपना सुझाव रिपोर्ट के रूप में सौंपता है।
उल्लेखनीय है कि आयोग का कार्यकाल मूल रूप से अक्टूबर 2019 तक था। लेकिन, राष्ट्रपति ने बीते जुलाई में इसका कार्यकाल एक महीना बढ़ाकर 30 नवंबर 2019 तक कर दिया था। वक्तव्य में कहा गया है कि वित्त आयोग का कार्यकाल बढ़ने से उसे वर्ष 2020 से 2026 की अवधि के लिये रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में सहूलियत होगी। इस दौरान आयोग नये आर्थिक सुधारों और वास्तविकताओं के मद्देनजर वित्तीय अनुमानों के लिये विभिन्न तुलनात्मक अनुमानों का परीक्षण कर सकेगा।
चुनाव आचार संहिता लागू होने की वजह से कई तरह के प्रतिबंध लगे होने के कारण आयोग विभिन्न राज्यों की दौरा हाल ही में पूरा कर पाया है। इससे आयोग द्वारा राज्यों की जरूरतों का विस्तृत आकलन करने पर असर पड़ा है। आयोग को जो काम दिया गया है वह व्यापक क्षेत्र में फैला है। इनके प्रभाव की व्यापक जांच परख करने और उन्हें राज्यों और केन्द्र सरकार की जरूरतों के साथ जोड़कर देखने में अतिरिक्त समय की जरूरत होगी।