गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) की ओर से केंद्र ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के एक आदेश के खिलाफ एनसीएलएटी का दरवाजा खटखटाया है।
केंद्र ने दिया तर्क
दरअसल एनसीएलटी ने जांच एजेंसी को दो कंपनियों के कामकाज की जांच करने के निर्देश दिए थे। केंद्र ने तर्क दिया है कि दिवाला न्यायाधिकरण के पास इस तरह की जांच का आदेश देने का अधिकार नहीं है।
इस संदर्भ में एसएफआईओ ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के समक्ष प्रस्तुत याचिका में कहा कि वह एक सांविधिक जांच कार्यालय है और केवल कॉर्पोरेट मामलों का मंत्रालय ही उसे कंपनियों के मामलों की जांच करने का निर्देश दे सकता है। यह मामला पिछले सप्ताह सुनवाई के लिए एनसीएलएटी के समक्ष रखा गया था। जिसके बाद न्यायाधिकरण ने एनसीएलटी की प्रधान पीठ के लग्जरी ट्रेन प्राइवेट लिमिटेड और जाइंक एक्सपोर्ट्स के मामलों में जांच करने के आदेश को रोक दिया है।
एनसीएलएटी के चेयरपर्सन न्यायमूर्ति एसजे मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने 19 सितंबर को कहा कि, 'अगले आदेश तक एनसीएलटी के 24 जुलाई और 26 जुलाई, 2019 दोनों आदेश पर रोक रहेगी।' हालांकि, एनसीएलएटी पीठ ने यह भी कहा कि कानून के अनुसार प्रक्रिया जारी रहेगी। पीठ ने दोनों याचिकाओं पर 22 अक्टूबर, 2019 को सुनवाई का आदेश दिया।