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एयर इंडिया: विदेशी नियंत्रण के नियम को आसान बना सकती है सरकार

Tue, 03 Dec 2019 08:43 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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- फोटो : PTI
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सरकार कर्ज में डूबी एयर इंडिया की बिक्री की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए ‘विदेशी नियंत्रण’ को अनुमति देने के लिए एक नियम में संशोधन पर विचार कर रही है। अगर ऐसा होता है कि एयर इंडिया के नियंत्रण को अपने हाथ में लेने की इच्छुक विदेशी कंपनियों को लुभाना आसान हो जाएगा। इससे सरकारी विमानन कंपनी को बेचना आसान हो सकता है।

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ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने कहा कि नवंबर की शुरुआत में हुई एक बैठक में उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग ने विमानन मंत्रालय से पूछा कि क्या ‘वास्तविक स्वामित्व और प्रभावी नियंत्रण’ के खंड में बदलाव किया जाना व्यवहार्य होगा। 

यह नियम कहता है कि एक विमानन कंपनी का नियंत्रण हमेशा ही भारतीय हाथों में होना चाहिए। इसके चलते एयर इंडिया के लिए बोली लगाने से विदेशी कंपनियां बचती रही हैं। इस खंड को हटाए जाने से विदेशी हितधारक स्थानीय विमानन कंपनियों से जुड़े बड़े फैसले ले सकेंगे। इससे एयर इंडिया को बेचने के लिए विदेशी निवेशकों को लुभाना आसान हो सकता है।
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वर्तमान में किसी स्थानीय विमानन कंपनी में विदेशी विमानन कंपनी 49 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी नहीं खरीद सकती है। इस संबंध में भेजे गए ई-मेल पर डीपीआईआईटी से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

अगर सरकार एयर इंडिया को नहीं बेचती है, तो फिर भविष्य में इसको चलाना मुश्किल हो जाएगा। केंद्रीय उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि एयर इंडिया सरकार के लिए प्रथम श्रेणी की संपत्ति है।जब इसे बेचने निकलेंगे तो फिर बोली लगाने वाली कंपनियां भी सामने आएंगी। हालांकि इसी बीच बुधवार को कंपनी ने नैरोबी के लिए लंबे समय बाद अपनी उड़ान सेवा को शुरू कर दिया है।

कर्मचारियों को प्रशिक्षित करेगी नई कंपनी

एयर इंडिया के कर्मचारियों के भविष्य के सवाल पर पुरी ने कहा कि हम इस बात के लिए प्रतिबद्ध हैं कि एयरलाइन के 11 हजार पूर्णकालिक और 4 हजार संविदा कर्मचारियों के साथ न्याय हो। जो भी एयरलाइन को खरीदेगा उसे प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत भी पड़ेगी।

अगर विनिवेश नहीं हो पाएगा तो मजबूरन उसे बंद करना पड़ सकता है। पुरानी ने कहा कि एयर इंडिया के सभी कर्मचारियों के हितों का पूरा ख्याल रखा जाएगा। लेकिन, एयरलाइन की स्थिति को देखते हुए अंतिम फैसला लेंगे।

सरकार ने पिछले साल भी एयरलाइन को बेचने की कोशिश की थी, लेकिन कोई खरीदार नहीं मिला। इसकी वजह ये मानी गई कि बिडिंग के लिए कड़ी शर्तें रखी गईं। इसलिए, बताया जा रहा है कि सरकार इस बार बोली प्रक्रिया को आसान रखेगी। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक एयर इंडिया पर 78 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। 

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