कानून लागू हुआ तो इसमें कई तरह की विसंगतियां भी सामने आईं। उदाहरण के लिए अगर आप रेस्तरां में रोटी खाते हैं तो आपको पांच फीसदी जीएसटी जुड़ता था। वहीं, पराठा ऑर्डर करने पर 18 फीसदी जीएसटी देना होता था। अब इस विसंगति को दूर कर दिया गया। अब आप रेस्टोरेंट में रोटी खाएं या पराठा दोनों पर कोई अतरिक्त कर नहीं देना होगा। बुधवार को हुए बदलावों के बाद इस तरह की कई विसंगतियां दूर कर दी गई हैं। जीएसटी की दो दरों को अब समाप्त कर दिया गया है। इनमें 12 फीसदी और 28 फीसदी टैक्स वाला स्लैब शामिल है। अभी आप अलग-अलग चीजों के हिसाब से आप 5, 12, 18 और 28 फीसदी जीएसटी देते आ रहे हैं।
इसके साथ ही लग्जरी आइटम्स और नुकसान पहुंचाने वाली वस्तुओं पर जीएसटी के साथ ही सेस भी देना पड़ता है। कई मामलों में इसकी वजह से कुल टैक्स 50% से भी ज्यादा पहुंच जाता था। जैसे 1200 सीसी से ज्यादा की पेट्रोल या 1500 सीसी से ज्यादा की डीजल कारों पर 28 फीसदी जीएसटी के साथ 17 से 22% तक सेस लगता है। इस वजह से कुल कर करीब 45 से 50% तक हो जाता है।
नए कर प्रावधानों की बात करें तो 22 सितंबर से आपको अलग-अलग वस्तुओं पर सिर्फ तीन श्रेणी के कर लगेंगे। 5 फीसदी, 18 फीसदी और 40 फीसदी। थोड़ी देर पहले हम जिन लग्जरी कारों की बात कर रहे थे उन कारों पर अब 40 फीसदी कर लगेगा। यानी 28 फीसदी जीएसटी की जगह आपको 40 फीसदी जीएसटी देना होगा। इसके बाद भी यह कारें सस्ती हो सकती हैं क्योंकि सेस से जुड़ी विसंगति को नए बदलाव में खत्म कर दिया गया है।
आइये कुछ और विसंगतियों को समझ लेते हैं, ये विसंगतियां कितनी दूर हुई हैं वो भी जान लेते हैं....
अगर आप पॉपकॉर्न खाने के शौकीन है तो अलग-अलग स्थिति में आपको इस पर तीन तरह का टैक्स देना होता था। किस तरह का पॉपकॉर्न आप खा रहे हैं और कैसी पैकिंग में आपने खरीदा है दोनों के हिसाब से टैक्स अलग-अलग था। अब पैकिंग से जुड़ी विसंगति को दूर कर दिया गया है। फ्लेवर के हिसाब से टैक्स अभी भी अलग-अलग होगा। इसे ऐसे समझिए नमक वाले पॉपकॉर्न पर पहले आपसे दो तरह का टैक्स लिया जाता था। अगर इसे खुला बेचा जा रहा है तो 5 फीसदी जीएसटी लगती थी। वहीं, अगर इसी पॉपकॉर्न को पैक या लेबल लगाकर बेचा जा रहा है तो इस पर 12 फीसदी टैक्स देना होता था। नई व्यवस्था में दोनों स्थिति में टैक्स को पांच फीसदी कर दिया गया है। लेकिन यानी कैरेमेल पॉपकॉर्न पर आपको अभी भी 18 फीसदी टैक्स देना होगा क्योंकि यह चीनी कन्फेक्शनरी के अंतर्गत आता है।
पराठों पर विवाद सुलझा
इससे पहले, फ्रोजन पराठों को लेकर भी जीएसटी वर्गीकरण को लेकर विवाद छिड़ा था। सादी रोटी पर जहां 5 प्रतिशत जीएसटी लगता था, वहीं पराठों को 18 प्रतिशत के स्लैब में रखा गया। अब यह मामला सुलझ गया है। अब सभी भारतीय रोटियों, चाहे उन्हें किसी भी नाम से पुकारा जाए, को छूट दी गई है। अब इन पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।
पनीर-दूध से बनी चीजों पर भी राहत
इसी तरह पनीर पर जीएसटी दरों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। जुलाई 2022 में हुई 47वीं जीएसटी परिषद की बैठक में स्पष्ट किया गया कि खुला (बिना ब्रांड वाला/बिना लेबल वाला) पनीर जीएसटी से मुक्त रहेगा, जबकि पहले से पैक और लेबल वाला पनीर 5% जीएसटी स्लैब में लाया गया है। अब आप कैसा भी पनीर खरीदते हैं तो वो जीएसटी से मुक्त रहेगा।
इसी तरह क्रीम बन्स पर भी जीएसटी कम दर से कर दिया गया है। पहले पेस्ट्री 18 प्रतिशत कर लगता था, जबकि बन्स और क्रीम पर अलग-अलग केवल 5 प्रतिशत कर लगता था। अब क्रीम बन्स सहित पेस्ट्रीज को 5 प्रतिशत के स्लैब में शामिल कर दिया गया है।