ईपीएफओ ने अग्रिम दावों के लिए ऑटो-सेटलमेंट सीमा को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया है। इस फैसले से ईपीएफओ सदस्यों को अचानक जरूरत पड़ने पर तेजी से पैसे मिल सकेंगे। विभाग की ओर से दी गई इस सुविधा का लाभ लाखों सदस्यों को मिलने की उम्मीद है। केंद्रीय श्रम व रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने मंगलवार को यह बात कही।
सेवानिवृत्ति निधि निकाय ईपीएफओ के ग्राहक जल्द ही अपने बैंक खातों को ईपीएफ से जोड़ने के बाद एटीएम या यूपीआई जैसे अन्य तरीकों से अपने खाते से सीधे अपने कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) की निकासी कर सकेंगे।
एक उच्च पदस्थ सूत्र ने बताया कि श्रम मंत्रालय एक ऐसी परियोजना पर काम कर रहा है, जिसमें ईपीएफ का एक निश्चित हिस्सा फ्रीज कर दिया जाएगा तथा एक बड़ा हिस्सा यूपीआई या एटीएम डेबिट कार्ड जैसे विभिन्न तरीकों का उपयोग करके बैंक खाते के माध्यम से निकाला जा सकेगा। सूत्र ने यह भी कहा कि इस प्रणाली को लागू करने में कुछ सॉफ्टवेयर चुनौतियां हैं, जिन्हें हल किया जा रहा है।
वर्तमान में, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के सदस्यों को अपने ईपीएफ धन तक पहुंचने के लिए निकासी दावों के लिए आवेदन करना पड़ता है, जो कि काफी समय लेने वाला काम है। स्वतः निपटान मोड के अंतर्गत, आवेदन पत्र दाखिल करने के तीन दिनों के भीतर निकासी दावों का निपटान, बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के, इलेक्ट्रॉनिक रूप से किया जाता है।
मंगलवार को इस ऑटो-सेटलमेंट मोड की सीमा मौजूदा एक लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दी गई। इससे बड़ी संख्या में ईपीएफओ सदस्यों को बीमारी, शिक्षा, विवाह और आवास के प्रयोजनों के लिए तीन दिनों के भीतर अपने ईपीएफ धन का उपयोग करने की सुविधा मिलेगी।
ईपीएफओ, जिसके 7 करोड़ से अधिक सदस्य हैं, ने वित्तीय संकट का सामना करने वालों को त्वरित सहायता प्रदान करने के लिए कोविड-19 महामारी के दौरान पहली बार अग्रिम दावों का ऑनलाइन स्वत: निपटान शुरू किया था। हालांकि, सभी सदस्यों को अपने ईपीएफ तक पहुंच के लिए दावा दायर करना होगा।
नई प्रणाली इस समय लेने वाली प्रक्रिया से बचने और ईपीएफओ का बोझ कम करने के लिए विकसित की जा रही है, क्योंकि हर साल 5 करोड़ से अधिक दावे, जिनमें से ज्यादातर ईपीएफ निकासी के लिए होते हैं, निपटाए जाते हैं।
सूत्र ने बताया कि ईपीएफओ अपने सदस्यों को ईपीएफ खातों से सीधे पैसा निकालने की अनुमति नहीं दे सकता, क्योंकि संस्था के पास कोई बैंकिंग लाइसेंस नहीं है। हालांकि, सूत्र ने कहा कि सरकार ईपीएफओ की सेवाओं को बैंकों के बराबर सुधारना चाहती है।