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सर्राफा बाजार: सोना 1,400 रुपये और चांदी 2,000 रुपये सस्ती; मजबूत रुपये का असर, जानिए क्या भाव

Mon, 12 Oct 2026 07:00 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राष्ट्रीय राजधानी में सोने की कीमतें 1,400 रुपये गिरकर 1.53 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम हो गईं। मजबूत रुपये और वैश्विक बाजारों में कमजोरी के कारण घरेलू सर्राफा दरों पर दबाव पड़ा। चांदी भी 2,000 रुपये सस्ती हुई। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं। 
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सोने-चांदी का भाव - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार को सोने की कीमतों में 1,400 रुपये की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरकर 1.53 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया। शुक्रवार को 99.9 फीसदी शुद्ध धातु 1,54,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई थी।

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अखिल भारतीय सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, चांदी की कीमतों में भी 2,000 रुपये की कमी आई। सभी करों सहित यह 2,26,500 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। पिछले बंद भाव 2,28,500 रुपये प्रति किलोग्राम था। भारतीय रुपया 96 पैसे मजबूत होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.75 पर बंद हुआ। यह छह महीने से अधिक समय में रुपये की सबसे तेज एक दिवसीय वृद्धि थी। भारतीय रिजर्व बैंक ने घरेलू इकाई को मजबूत करने के लिए कई उपाय किए थे।

सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट क्यों आई?

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक- कमोडिटीज, सौमिल गांधी ने बताया कि कमजोर वैश्विक संकेतों के कारण घरेलू बाजार में सोने की कीमतें कम हुईं। मजबूत भारतीय रुपये ने कीमती धातुओं की कीमतों पर और दबाव डाला। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हाजिर सोना 17.36 डॉलर (0.41 फीसदी) गिरकर 4,176.88 डॉलर प्रति औंस हो गया। चांदी मामूली गिरावट के साथ 60.66 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। घरेलू सोने की खरीद सुस्त रही क्योंकि कीमतें फिर से बढ़ी थीं। चीन में मांग छुट्टियों के कारण कम हुए व्यापारिक अवधि के बाद सुधरने की उम्मीद है।

रुपये की मजबूती का क्या असर हुआ?

रुपये की मजबूती ने सोने के आयात को सस्ता कर दिया। इससे घरेलू बाजार में सोने की मांग प्रभावित हुई। भारतीय रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप ने रुपये को सहारा दिया। केंद्रीय बैंक ने सप्ताहांत में कई कदम उठाए थे। इन उपायों का उद्देश्य घरेलू मुद्रा को मजबूत करना था। यह रुपये को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत करने में सहायक रहा।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्या स्थिति है?

ब्रोकरेज मंच लेमन के शोध प्रमुख गौरव गर्ग ने कहा कि कच्चे तेल की नरम कीमतों के बावजूद सोना वैश्विक बाजारों में 4,179 डॉलर प्रति औंस के आसपास निचले स्तर पर कारोबार कर रहा था। अमेरिकी डॉलर सूचकांक 18 महीने के उच्च स्तर के करीब रहा, जिसने कीमती धातुओं में तेजी की संभावना को सीमित किया। कच्चे तेल की कीमतें भी गिरीं, क्योंकि रूसी ऊर्जा आपूर्ति में वृद्धि की उम्मीदों ने तत्काल आपूर्ति चिंताओं को कम किया। हालांकि, पश्चिम एशिया में नए सिरे से तनाव और क्षेत्रीय शिपिंग के लिए जोखिमों ने तेल दरों में अस्थिरता को बढ़ावा दिया। 

जियोटस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विक्रम सुब्बुराज के अनुसार, सोने का अल्पकालिक दृष्टिकोण मजबूत है, जबकि चांदी की धीमी बढ़त के लिए अधिक सावधानी की आवश्यकता है। निवेशक डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल, रुपये और आगामी मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर नजर रखेंगे।

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